नयी दिल्ली, 18 अक्टूबर (भाषा) स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) ने एक परिवीक्षाधीन अधिकारी के आचरण को ‘‘असंतोषजनक’’ और ‘‘सरकारी कर्मचारी के लिए अनुपयुक्त’’ पाए जाने के बाद उसे बर्खास्त कर दिया है।
मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की जांच करने वाली केंद्रीय एजेंसी ने 29 वर्षीय कनिष्ठ खुफिया अधिकारी विशाल कुंडारा की बर्खास्तगी का आदेश जारी किया था। वह अक्टूबर 2023 में एनसीबी में शामिल हुआ था और उसकी नौकरी के तीन साल भी पूरे नहीं हुए थे।
कुंडारा की तैनाती चेन्नई में थी। उसके आचरण पर गौर करने के बाद उसे एनसीबी के गुवाहाटी जोनल कार्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद उसे नागालैंड के दीमापुर स्थित एनसीबी के क्षेत्रीय कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया।
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की गुवाहाटी पीठ ने सितंबर के अंतिम सप्ताह में कुंडारा की याचिका खारिज कर दी। कुंडारा ने एनसीबी के सेवा समाप्ति आदेश को रद्द करने और बहाली की मांग की थी।
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश में कहा गया, ‘‘ हमारी यह राय है कि 30 मार्च 2026 का विवादित सेवा समाप्ति आदेश आवेदक के कामकाज, आचरण और सरकारी सेवा के लिए उसकी समग्र उपयुक्तता के उचित आकलन के बाद जारी किया गया था। यह कानूनी, वैध और लागू नियमों के अनुरूप है।’’
कुंडारा की याचिका खारिज करने की मांग करते हुए एनसीबी ने अधिकरण के समक्ष मामले का ब्योरा प्रस्तुत किया था।
एजेंसी ने कुंडारा के इस तर्क को खारिज कर दिया कि उसे विभागीय जांच किए बिना बर्खास्त किया गया।
एनसीबी ने कहा, ‘‘यह बखूबी स्थापित कानून है कि परिवीक्षाधीन कर्मचारी को पद पर स्थायी रूप से बने रहने का अधिकार नहीं होता। नियोक्ता परिवीक्षा अवधि के दौरान उसकी उपयुक्तता का आकलन करने और अनुपयुक्त पाए जाने पर उसकी सेवा समाप्त करने के लिए पूरी तरह सक्षम है।’’
आदेश के अनुसार, अधिकारी के दुर्व्यवहार और अनुशासनहीनता के बार-बार मामले सामने आए। एनसीबी ने पाया कि बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद उसने अपने आचरण में सुधार नहीं किया।
अधिकरण ने कहा कि चेन्नई से गुवाहाटी स्थानांतरित किए जाने के बाद भी आवेदक ने अपने व्यवहार में सुधार नहीं किया।
भाषा शोभना सुभाष
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