तिरुवनंतपुरम, 18 अक्टूबर (भाषा) केरलम के देवस्वओम मंत्री के. मुरलीधरन ने शबरिमला की आगामी वार्षिक तीर्थयात्रा को लेकर देवस्वओम बोर्ड की तैयारियों पर रविवार को असंतोष जताया।
मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन और देवस्वओम मंत्री ने एक दिन पहले आगामी तीर्थयात्रा की तैयारियों और श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लेने के लिए शबरिमला से जुड़े विभिन्न स्थानों का दौरा किया था।
समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिर के अनुष्ठानों और प्रसाद से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं देवस्वओम बोर्ड के नियंत्रण में हैं। बोर्ड के अध्यक्ष ने आश्वासन दिया है कि मंदिर में प्रसाद या अन्य सुविधाओं की कोई कमी नहीं होगी।
मुरलीधरन ने रविवार को एक टीवी चैनल से कहा कि प्रसाद के रूप में दिए जाने वाले ‘अरवण पायसम’ को बनाने वाले संयंत्र की मरम्मत और नवीनीकरण का काम अभी पूरा नहीं हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि भीड़ प्रबंधन को लेकर देवस्वओम बोर्ड और पुलिस के बीच समन्वय की कमी नजर आ रही है।
मंत्री ने कहा कि उनकी दो प्रमुख चिंताएं तीर्थयात्रा के लिए बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को नियंत्रित करना और उनके लिए पर्याप्त मात्रा में ‘अप्पम’ तथा ‘अरवण’ प्रसाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
‘अरवण’ लाल चावल, गुड़, घी, इलायची पाउडर और अदरक पाउडर से तैयार किया जाने वाला गाढ़ा मीठा व्यंजन है, जबकि ‘अप्पम’ चावल और गुड़ से बनने वाला पारंपरिक मीठा पकवान है। ये दोनों शबरिमला स्थित भगवान अयप्पा मंदिर के प्रमुख प्रसाद हैं।
मुरलीधरन ने कहा, ‘‘प्रसाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों से मैं पूरी तरह संतुष्ट नहीं हूं। बोर्ड ने अब तक चावल की खरीद के लिए ठेका भी नहीं दिया है। मुझे बताया गया है कि संयंत्र की मरम्मत और नवीनीकरण का काम पांच नवंबर तक पूरा हो जाएगा और इसके बाद उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा।’’
मंत्री ने कहा कि उन्होंने बोर्ड को इन मुद्दों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।
मंत्री ने बताया कि रविवार को शुरू हुई ‘तुला मासम’ पूजा से पहले शनिवार को 29,000 श्रद्धालु मंदिर पहुंचे थे और वर्तमान में मंदिर में दो लाख ‘अरवण’ प्रसाद भंडार में हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने बोर्ड से कहा है कि 22 अक्टूबर (मंदिर के कपाट फिर से बंद होने के दिन) तक इस मामले में विशेष सावधानी बरतें। उसके बाद उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि हालात और बेहतर हों।
पारंपरिक मलयालम कैलेंडर के तीसरे महीने ‘तुला मासम’ के दौरान शबरिमला मंदिर 18 अक्टूबर से 22 अक्टूबर तक पांच दिन के लिए खुला रहेगा।
मुरलीधरन ने यह भी कहा कि मंदिर के रखरखाव से जुड़े कार्यों को पूरा करने में देरी हुई है।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार सभी जरूरी कदम उठा रही है।’’
बाद में त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) के अध्यक्ष के. जयकुमार ने शबरिमला में संवाददाताओं से कहा कि ‘अरवण’ के वितरण के लिए पांच वेंडिंग मशीनें लगाई गई हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘श्रद्धालु इनमें पैसे डालकर बिना कतार में लगे ‘अरवण’ ले सकते हैं। हमारे पास ‘अरवण’ के 3.2 लाख डिब्बे भंडार में हैं और हम हर दिन लगभग 1.5 लाख डिब्बे तैयार कर रहे हैं। 25 अक्टूबर के बाद दूसरा संयंत्र भी चालू हो जाएगा जिसके बाद हम रोजाना 3.5 लाख डिब्बे तैयार कर सकेंगे।’’
उन्होंने बताया कि तीर्थयात्रा के दौरान भी ऐसी ही व्यवस्था रहेगी और ‘अरवण’ की कोई कमी नहीं होगी।
उन्होंने दावा किया, ‘‘‘वझीपाडु’ (चढ़ावे) से जुड़ी सभी चीजों की आपूर्ति के लिए ठेके दे दिए गए हैं और उन्हें मंदिर परिसर में लाया जा रहा है।’’
भीड़ नियंत्रण को लेकर पुलिस के साथ समन्वय के बारे में जयकुमार ने कहा कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने पर समन्वय प्रभावित हो सकता है लेकिन इस समस्या का समाधान कर लिया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए कोई बुकिंग शुल्क नहीं है, यह पूरी तरह से मुफ्त है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर कोई श्रद्धालुओं के कल्याण के लिए कुछ दान देना चाहता है तो वह कम से कम पांच रुपये दान कर सकता है।’’
जयकुमार ने बताया कि मंदिर परिसर में लगभग 70 प्रतिशत रखरखाव का काम पूरा हो चुका है और शेष काम भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘इसे लेकर कोई चिंता की बात नहीं है।’’
शबरिमला श्री धर्म शास्ता मंदिर 41 दिवसीय मंडलम तीर्थयात्रा सत्र के लिए 17 नवंबर को खुलेगा।
भाषा सुरभि सुभाष
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