ग्वालियर, 18 अक्टूबर (भाषा) मध्यप्रदेश के ग्वालियर में शनिवार देर रात तेज रफ्तार एक ट्रक ने शीतला माता मंदिर के बाहर खड़े श्रद्धालुओं को रौंद दिया, जिसके बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और चारों ओर अफरा-तफरी फैल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पंजाब के पंजीकरण नंबर वाला ट्रक मंदिर के पास प्रतिबंधित क्षेत्र में ‘‘तूफान की तरह’’ घुसा और कुछ ही सेकंड में वहां अफरा-तफरी मच गई।
चिनोर रोड पर ढलान के पास मंदिर के बाहर रात करीब डेढ़ बजे हुए इस हादसे में 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि 28 अन्य लोग घायल हो गए।
कई श्रद्धालुओं और सड़क किनारे स्थित दुकानों को टक्कर मारने के बाद ट्रक मंदिर के प्रवेश द्वार से जा टकराया, जिससे दीवार ढह गई।
जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित लगभग 125 साल पुराने इस मंदिर में नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और इनमें से कई श्रद्धालु नंगे पैर चलकर माता के दर्शन करने आते हैं।
हादसे के बाद प्रत्यक्षदर्शियों ने सवाल उठाया कि त्योहार के दौरान वाहनों की आवाजाही पर सख्त प्रतिबंध होने के बावजूद एक भारी वाहन भीड़भाड़ वाले मंदिर परिसर तक कैसे पहुंच गया।
श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर पार्किंग की व्यवस्था की गई है।
घटनास्थल के पास मौजूद श्रद्धालु सौरभ ने कहा कि ट्रक ढलान से तेज रफ्तार में नीचे आया और किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
उन्होंने कहा, ‘‘मंदिर के पास सड़क ढलान पर थी और ट्रक तेजी से नीचे आया। किसी को समझ नहीं आया कि क्या हुआ। जब लोगों की चीखें सुनाई दीं, तब हमें हादसे की गंभीरता का एहसास हुआ।’’
सौरभ ने बताया कि वह आगे की ओर निकलने में कामयाब रहे, लेकिन उनका भाई ट्रक के नीचे फंस गया।
उन्होंने बताया कि ट्रक के नीचे दबे कई लोग बाहर निकलने के लिए छटपटाते रहे, जिनमें से कुछ किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे।
प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि धान से लदे ट्रक को हटाने में काफी समय लगा।
सौरभ के मुताबिक, तड़के करीब चार बजे पांच क्रेन की मदद से पलटे हुए ट्रक को उठाया गया और इसी दौरान पुलिस भी मौके पर पहुंची तथा मृतकों व घायलों को नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाने में मदद की।
हालांकि, कुछ परिवारों की मुश्किलें बचाव अभियान के बाद भी खत्म नहीं हुईं। हादसे में अपने 19 वर्षीय बेटे को खोने वाली किरण ने आरोप लगाया कि दुर्घटना के बाद उनका बेटा सांस ले रहा था लेकिन पुलिस ने उसे अस्पताल पहुंचाने में देरी की।
उन्होंने दावा किया कि सरकारी अस्पताल ले जाने में हुई देरी के कारण उनके बेटे की जान चली गई।
मंदिर के पास पूजा सामग्री की दुकान चलाने वाले गजेंद्र प्रजापति ने बताया कि ट्रक की टक्कर इतनी जोरदार थी कि आसपास का पूरा इलाका धुएं और धूल से भर गया।
हादसे से नाराज प्रत्यक्षदर्शियों ने वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध के बावजूद ट्रक के मंदिर तक पहुंचने की घटना की विस्तृत जांच कराने और सुरक्षा में लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
ग्वालियर की कलेक्टर रुचिका चौहान ने बताया कि ट्रक पुलिस के अवरोधक तोड़ते हुए तेज रफ्तार में मंदिर परिसर की ओर बढ़ गया था।
उन्होंने बताया कि वाहन को रोकने की कोशिश में दो पुलिसकर्मी भी घायल हो गए।
चौहान ने बताया कि क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) को ट्रक की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार ने हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को दो-दो लाख रुपये और मामूली रूप से घायल लोगों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।
भाषा सं दिमो जितेंद्र
जितेंद्र