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एनसीएलएटी ने स्वराज इंडिया के खिलाफ वालचंदनगर की दिवाला याचिका बहाल की

नयी दिल्ली, 18 अक्टूबर (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने स्वराज इंडिया एग्रो के खिलाफ दिवाला याचिका खारिज किए जाने को चुनौती देने वाली वालचंदनगर इंडस्ट्रीज की अपील बहाल कर दी है और इस पर नोटिस जारी किया है।

यह अपील उच्चतम न्यायालय के 28 जुलाई के आदेश के बाद बहाल की गई है। उच्चतम न्यायालय ने एनसीएलएटी के उस पूर्व आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें वालचंदनगर की दिवाला अपील खारिज कर दी गई थी।

शीर्ष अदालत ने दो लाख रुपये का जुर्माना जमा करने की शर्त पर अपील को उसकी मूल स्थिति में बहाल करने का निर्देश दिया था।

एनसीएलएटी ने 11 मई को स्वराज इंडिया के खिलाफ वालचंदनगर की अपील खारिज कर दी थी। उसने अपील दोबारा दाखिल करने में हुई 193 दिन की देरी को माफ करने से इनकार कर दिया था।

अपीलीय न्यायाधिकरण ने कहा था कि कंपनी देरी को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त कारण नहीं बता सकी।

भारी इंजीनियरिंग क्षेत्र की कंपनी वालचंदनगर इंडस्ट्रीज ने एनसीएलएटी के इस आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी।

शीर्ष अदालत ने आदेश रद्द करते हुए दो लाख रुपये का जुर्माना जमा करने की शर्त पर दिवाला अपील बहाल कर दी।

उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि एनसीएलएटी की रजिस्ट्री ने जुलाई, 2025 से जनवरी, 2026 के बीच पांच बार अपील में खामियों की जानकारी दी थी। वहीं, अपीलकर्ता ने जुलाई, 2025 से फरवरी, 2026 के बीच संबंधित तारीखों पर इन खामियों को दूर करने के प्रयास किए थे।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि खामियों की जानकारी एक साथ देने के बजाय अलग-अलग मौकों पर दी गई थी। ऐसे में उन्हें दूर करने की प्रक्रिया में ‘‘उदार दृष्टिकोण’’ अपनाया जा सकता है।

इसके बाद एनसीएलएटी की तीन सदस्यीय प्रधान पीठ ने बृहस्पतिवार को स्वराज इंडिया को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कंपनी के वकील ने इस निर्देश को स्वीकार कर लिया।

कार्यवाहक अध्यक्ष न्यायमूर्ति योगेश खन्ना और तकनीकी सदस्य बरुण मित्रा तथा अजय दास मेहरोत्रा की पीठ ने कहा, ‘‘हमने उच्चतम न्यायालय के 28 जुलाई, 2026 के आदेश का अवलोकन किया है, जिसमें प्रतिवादी पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाने की शर्त पर मौजूदा अपील बहाल की गई है।’’

भाषा योगेश अजय

अजय