नयी दिल्ली, 18 अक्टूबर (भाषा) अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में भारत के पूर्व कार्यकारी निदेशक कृष्णमूर्ति वी. सुब्रमण्यन ने पाकिस्तान के वैश्विक वित्तीय नेतृत्व में वापसी को ‘ऐतिहासिक उपलब्धि’ बताए जाने को खारिज करते हुए कहा कि आईएमएफ और विश्व बैंक के शासी मंडल की अध्यक्षता केवल औपचारिक पद है और यह हर साल बदलती रहती है।
सुब्रमण्यन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ‘‘दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान 74 साल बाद वैश्विक वित्तीय क्षेत्र के शीर्ष मंच पर लौट रहा है। हकीकत यह है कि पाकिस्तान 2027 में आईएमएफ और विश्व बैंक की वार्षिक पूर्ण बैठक की अध्यक्षता करेगा। यह पद पूरी तरह औपचारिक है और हर साल बदलता है। इस साल यह जिम्मेदारी पराग्वे के पास है, जबकि 2025 में काबो वर्दे के पास थी। यह केवल एक औपचारिक प्रक्रिया है, शक्ति का प्रतीक नहीं।’’
पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा था कि देश को 2027 के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का अगला अध्यक्ष नामित किया गया है। पाकिस्तान को 1953 के बाद पहली बार यह जिम्मेदारी मिलेगी।
पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्री अहद खान चीमा को बैंकॉक में आयोजित 2026 की आईएमएफ और विश्व बैंक समूह की वार्षिक बैठकों के पूर्ण सत्र में औपचारिक रूप से अगला अध्यक्ष घोषित किया गया। चीमा विश्व बैंक में पाकिस्तान के गवर्नर भी हैं।
आईएमएफ-विश्व बैंक समूह की सालाना बैठकें 12 से 18 अक्टूबर तक आयोजित की गईं, जिसमें 191 देशों के 15,000 से अधिक भागीदारों ने हिस्सा लिया।
भाषा योगेश अजय
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