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रणथम्भौर के बाहरी जोन में बाघ ‘जय’ का दबदबा, 70 वर्ग किलोमीटर में फैला है ‘एकछत्र राज’

जयपुर, 18 अक्टूबर (भाषा) राजस्थान के रणथम्भौर बाघ अभयारण्य में बाघ ‘जय’ (टी-108) ने जोन छह से 10 तक करीब 70 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अपना वर्चस्व कायम कर रखा है। आमतौर पर अन्य बाघों के वर्चस्व वाला इलाका 15 से 25 वर्ग किलोमीटर तक होता है।

हाल में चेहरे के पास चोट के निशान मिलने के बाद वन विभाग बाघ की गतिविधियों और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रख रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, उसकी स्थिति में अब सुधार है और वह सामान्य रूप से विचरण कर रहा है।

विभाग के अधिकारियों के अनुसार, रणथम्भौर में बाघों के क्षेत्रीय वर्चस्व का समीकरण समय के साथ बदलता रहा है। एक समय जोन एक से पांच तक बाघिन मछली (टी-16) का दबदबा था, जबकि बाहरी जोनों में बाघ टी-58 का वर्चस्व रहा। करीब दो साल पहले टी-58 की मौत के बाद टी-108 ने बाहरी जोन में अपना मजबूत इलाका स्थापित कर लिया। अब इन बाहरी जोन में बाघ टी-108 ‘जय’ का राज है।

वन अधिकारियों के मुताबिक, क्षेत्रफल के लिहाज से यह रणथम्भौर में किसी बाघ का सबसे बड़ा इलाका माना जा रहा है।

रणथम्भौर बाघ परियोजना के उपवन संरक्षक मानस सिंह ने बताया कि बाघ ‘जय’ की मुख्य रूप से फलौदी और ‘रेंज ऑफिस प्रोजेक्ट टाइगर’ में गतिविधि रहती है। बाहरी जोन में सफारी पर आने वाले पर्यटकों को यह अक्सर दिख जाता है, जिससे यह सैलानियों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। कैमरा ट्रैप और प्रत्यक्ष रूप से देखे जाने के आधार पर वन विभाग की टीम उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही हैं।

रणथम्भौर के फील्ड बायोलॉजिस्ट मोहम्मद मैराज के अनुसार, बाघ टी-108 मशहूर बाघिन टी-8 ‘लाडली’ और बाघ टी-34 ‘कुंभा’ की संतान है। वर्ष 2016 में लाडली ने दो शावकों जय (टी-108) और वीरू (टी-109) को जन्म दिया था।

मैराज के अनुसार, वर्ष 2019 में रणथम्भौर के जोन 10 में वीरू का बाघ टी-42 ‘फतेह’ के साथ क्षेत्रीय संघर्ष हुआ था। इस लड़ाई में वीरू गंभीर रूप से घायल हो गया और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। भाई की मौत के बाद बाघ ‘जय’ अकेला रह गया और बाद में उसने जंगल के अलग-अलग क्षेत्रों में भी अपना एकछत्र राज कायम किया।

मानस सिंह ने बताया कि हाल में बाघ ‘जय’ के चेहरे पर चोट के निशान दिखे। चोट लगने के कारणों की अभी पुष्टि नहीं हुई है। अन्य बाघ के साथ संघर्ष की आशंका को भी फिलहाल पुख्ता तौर पर नहीं कहा जा सकता।

मानस सिंह ने बताया कि वन विभाग की टीम उसकी गतिविधियों और स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है तथा पशु चिकित्सा टीम भी उसकी स्थिति पर नजर रखे हुए है। फिलहाल ‘जय’ की स्थिति में काफी सुधार देखा गया है और वह सामान्य रूप से विचरण कर रहा है।

भाषा बाकोलिया सुरभि

सुरभि