(शिरीष बी प्रधान)
काठमांडू, 17 अक्टूबर (भाषा) नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शनिवार को देश के सबसे बड़े त्योहार ‘बड़ा दशैं’ या विजयदशमी के अवसर पर शुभकामनाएं दीं तथा पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका को रेखांकित किया।
उनके संदेश 15 दिवसीय दशैं त्योहार के सातवें दिन फूलपाती के अवसर पर आए। फूलपाती को मुख्य उत्सव की औपचारिक शुरुआत माना जाता है। इस दौरान सरकारी कार्यालय बंद हो जाते हैं और पूरे देश में उत्सव का वातावरण बन जाता है।
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने अपने संदेश में कहा कि उनकी सरकार नेपाल में रोजगार के अवसर पैदा करने और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि नागरिकों को नौकरी की तलाश में विदेश जाने के लिए मजबूर करने वाली स्थिति को समाप्त किया जा सके।
उन्होंने बड़ा दशैं को परिवारों के पुनर्मिलन का त्योहार बताते हुए कहा कि यह एकता, आपसी जुड़ाव और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करता है।
बालेंद्र ने कहा कि धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व वाला यह त्योहार दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले नेपाली लोगों को भी एकजुट करने में मदद करता रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अनेक चुनौतियों का सामना करने के बावजूद नेपाली लोग दशैं मनाते रहे हैं और अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक तथा सामाजिक परंपराओं को संरक्षित रखते आए हैं।
हाल ही में भोटेकोशी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ का जिक्र करते हुए बालेंद्र ने कहा कि इस वर्ष दशैं ऐसे समय आया है, जब आपदा में हुई जान-माल की क्षति का दुख अभी ताजा है। इस बाढ़ में 1,455 लोगों की मौत हुई, 5,285 लोग लापता हो गए और 13,000 से अधिक लोगों को बचाया गया।
उन्होंने आपदा में जान गंवाने वालों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की, घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार आपदा के कारण विस्थापित हुए लोगों के पुनर्वास के लिए काम कर रही है।
इस वर्ष विजयदशमी का पर्व 21 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
एक अलग संदेश में राष्ट्रपति पौडेल ने देश और विदेश में रहने वाले नेपाली नागरिकों को सुख, शांति, समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और निरंतर प्रगति की शुभकामनाएं दीं।
राष्ट्रपति ने कहा कि यह त्योहार नेपाल की भौगोलिक, सांस्कृतिक और भाषाई विविधता के बीच सामाजिक एकता को मजबूत करने के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने में भी मदद करता है।
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