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नया आशियानाः दिल्ली में लड़कों से अधिक लड़कियों को लिया गया गोद

(श्रुति भारद्वाज)

नयी दिल्ली, 17 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली में पिछले 11 वर्षों में लड़कों से अधिक लड़कियों को गोद लिया गया। वर्ष 2015-16 से 2025-26 तक शहर में 1,000 से अधिक लड़कियों और लगभग 760 लड़कों को नए आशियाने मिले। यही नहीं, वर्ष 2025-26 के दौरान विशेष आवश्यकताओं वाले छह बच्चों को भी नए परिवारों ने अपनाया।

विशेष आवश्यकता वाले बच्चों से तात्पर्य उन बच्चों से है जिन्हें शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक या विकासात्मक स्तर पर अतिरिक्त देखभाल, सहायता और चिकित्सीय ध्यान देने की आवश्यकता होती है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि दिल्ली में वर्ष 2015-16 से 2025-26 की अवधि के दौरान, वर्ष 2015-16 में सबसे अधिक 178 बच्चों को गोद लिया गया, जो इन 11 वर्षों का एक वर्ष का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

उन्होंने बताया कि इसके बाद इस संख्या में उतार-चढ़ाव के साथ गिरावट दर्ज की गई और वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा घटकर 87 पर आ गया, जो इस पूरी अवधि का सबसे निचला स्तर है।

उन्होंने बताया कि विभाग ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को परिवार दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं, क्योंकि पहले ऐसे बच्चों को गोद लेने की दर शून्य थी। उन्होंने कहा कि विभाग ने इन बच्चों के कौशल विकास और संभावित माता-पिता को उनकी जरूरतों के प्रति जागरूक कर वर्ष 2025-26 में ऐसे छह बच्चों को परिवार दिलाने में मदद की है। छह में से दो बच्चों को देश में और चार बच्चों को विदेश में रहने वाले परिवारों ने गोद लिया है।

अधिकारी ने बताया कि बच्चों को गोद लेने की यह पूरी प्रक्रिया किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम और गोद लेने से जुड़े नियम-2022 के तहत पूरी की जाती है।

गोद लेने संबंधी नियमों के तहत बच्चों को उम्र के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा गया है—दो वर्ष तक, दो वर्ष से अधिक व चार वर्ष तक, चार वर्ष से अधिक व आठ वर्ष तक तथा आठ वर्ष से अधिक व 18 वर्ष तक।

अधिकारी के अनुसार, चालू वर्ष 2026 में जनवरी से सितंबर के नौ महीनों के दौरान दिल्ली में कुल 71 बच्चों को गोद लिया गया। इस अवधि में सबसे अधिक 14 बच्चों को अप्रैल महीने में गोद लिया गया, अगस्त महीने में सबसे कम केवल दो बच्चों को ही गोद लिया गया।

अधिकारी ने वर्षवार आंकड़ों का ब्योरा देते हुए बताया कि वित्तीय वर्ष 2015-16 में गोद लिए गए कुल 178 बच्चों में से 92 बच्चों (55 लड़कियां, 37 लड़के) को देश के भीतर और 86 बच्चों (57 लड़कियां, 29 लड़के) को विदेश में रहने वाले परिवारों ने गोद लिया।

इसके बाद वर्ष 2016-17 में कुल 168 (77 लड़कियां, 66 लड़के) और वर्ष 2017-18 में 121 बच्चों (88 देश में, 33 विदेश में) को नया परिवार मिला। वर्ष 2018-19 में यह संख्या 153 रही, जिसमें देश में 78 लड़कियां व 42 लड़के तथा विदेश में 25 लड़कियां व आठ लड़के गोद लिए गए।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2019-20 में कुल 124 (देश में 62 लड़कियां, 39 लड़के; विदेश में 14 लड़कियां, नौ लड़के) और 2020-21 में 102 बच्चों (देश में 45 लड़कियां, 39 लड़के; विदेश में सात लड़कियां, 11 लड़के) का पुनर्वास हुआ। सबसे निचले स्तर वाले वर्ष 2021-22 में कुल 87 बच्चों (देश में 51 लड़कियां, 19 लड़के; विदेश में 11 लड़कियां, छह लड़के) को अपनाया गया।

इसके बाद सुधार दर्ज करते हुए वर्ष 2022-23 में 94 बच्चे (देश में 49 लड़कियां, 27 लड़के; विदेश में 12 लड़कियां, छह लड़के), वर्ष 2023-24 में 97 बच्चे (देश में 53 लड़कियां, 35 लड़के; विदेश में पांच लड़कियां, चार लड़के) और वर्ष 2024-25 में 110 बच्चे (देश में 55 लड़कियां, 40 लड़के; विदेश में 10 लड़कियां, पांच लड़के) गोद लिए गए।

लगभग हर वर्ष देश और विदेश दोनों स्तरों पर लड़कों की तुलना में लड़कियों को अधिक गोद लिया गया। उदाहरण के लिए, वर्ष 2025-26 में गोद लिए गए कुल बच्चों में देश के भीतर 57 लड़कियां और 45 लड़के तथा विदेश में तीन लड़कियां और चार लड़के शामिल रहे।

भाषा सुमित पवनेश

पवनेश