नयी दिल्ली, 17 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष को कॉलेज में वित्तीय अनियमितताओं और अयोग्य उम्मीदवारों को दाखिला दिलाने के लिए मेधा अंकों में हेरफेर करने में संलिप्तता के मामले में जमानत दे दी है।
न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी बी वराले की पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के 23 फरवरी के उस आदेश के खिलाफ घोष की याचिका स्वीकार कर ली, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
पीठ ने घोष के लंबे समय से जेल में रहने और मुकदमे की सुनवाई में हुई प्रगति पर गौर किया। उसने कहा कि घोष दो साल से अधिक समय से हिरासत में हैं और अब तक 147 गवाहों में से केवल सात के बयान दर्ज किए गए हैं।
बृहस्पतिवार को दिए गए आदेश में पीठ ने कहा, ‘‘इन परिस्थितियों में, हिरासत में बिताई गई अवधि और मुकदमे की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए, हम उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द करने और इस अपील को स्वीकार करने के इच्छुक हैं।’’
पीठ ने कहा कि जमानत की शर्तें निचली अदालत तय करेगी।
भाषा शफीक अविनाश
अविनाश