Breaking News

मुंबई के कुर्ला में 13 मंजिला इमारत में लगी आग, 3 बच्चों समेत 9 लोग घायल     |   यूक्रेन: कीव में रूसी हवाई हमले में 3 लोगों की मौत, 6 घायल     |   कोलंबिया में सोने की खदान ढही, 6 मजदूरों की मौत; 12 से 15 लापता     |   टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के बाद बरेली में दिशा पाटनी के घर की सुरक्षा बढ़ाई गई     |  

तीन तलाक देने के मामले में व्यक्ति को दो साल के कठोर कारावास की सजा

पटना, 17 अक्टूबर (भाषा) बिहार की राजधानी पटना की एक अदालत ने पत्नी को तीन तलाक देने के मामले में एक व्यक्ति को दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन सहाय ने बृहस्पतिवार को नौशाद अहमद को मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के साथ ही भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना) और धारा 341 (गलत तरीके से रोकना) के तहत दोषी करार दिया।

अदालत ने अहमद पर 6,500 रुपये का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना नहीं भरने पर उसे एक महीने और 22 दिन की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। हालांकि, अदालत ने उसे पत्नी पर तेजाब फेंकने की कोशिश के आरोप से बरी कर दिया।

फुलवारी शरीफ थाने में सितंबर 2022 में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, सिमरी गांव के निवासी अहमद ने उस साल पांच सितंबर को अपनी पत्नी को तीन तलाक दिया था। उस समय दोनों की शादी को करीब 21 साल हो चुके थे और उनके तीन बच्चे हैं।

शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया था कि अहमद ने उसके एवं बच्चों के साथ मारपीट की थी और उस पर तेजाब फेंकने की कोशिश की थी। पुलिस ने इस मामले में 31 जुलाई 2023 को आरोपपत्र दाखिल किया था।

अहमद के वकील शेखर कुमार ने शनिवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि अभियोजन पक्ष तेजाब से हमले की कोशिश का आरोप साबित नहीं कर पाया।

उन्होंने अन्य आरोपों में अहमद को दोषी ठहराए जाने पर भी सवाल उठाए और कहा कि उनका मुवक्किल फिलहाल जमानत पर बाहर है तथा वह अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देगा।

कुमार ने बताया कि बचाव पक्ष अदालत के आदेश की प्रति मिलने का इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा कि पटना जिले में तीन तलाक के किसी मामले में पहली बार सजा सुनाई गई है।

मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत तत्काल तीन तलाक देना अवैध और अमान्य है। इस कानून में ऐसा करने वाले पति को तीन साल तक की कैद और जुर्माने की सजा का प्रावधान है।

लोकसभा ने इस विधेयक को 25 जुलाई 2019 और राज्यसभा ने 30 जुलाई 2019 को पारित किया था।

भाषा सिम्मी अविनाश

अविनाश