कोटा (राजस्थान), 17 अक्टूबर (भाषा) राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एनएमसीएच) में सिजेरियन प्रसव के बाद गुर्दे संबंधी गंभीर जटिलताओं से पीड़ित 40 वर्षीय महिला की उपचार के दौरान मौत हो गई। महिला के परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता का आरोप लगाया है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी।
महावीर नगर थाने के सर्किल इंस्पेक्टर हरेंद्र सिंह ने बताया कि कोटा जिले के छावनी की निवासी रेशमा की शुक्रवार देर रात अस्पताल में मौत हो गई।
सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
सिंह ने कहा कि मौत के सही कारण का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही चल सकेगा।
इसी अस्पताल में मई में भी ऐसी ही घटना सामने आई थी, जब प्रसव के बाद 12 महिलाओं को गुर्दे की गंभीर समस्याएं हुई थीं, जिनमें से पांच की मौत हो गई थी।
रेशमा और जिले के निमोड़ा हरीजी गांव की निवासी 30 वर्षीय अनीता को बृहस्पतिवार तड़के गुर्दे संबंधी गंभीर जटिलताएं हुईं। दोनों ने इससे एक दिन पहले अस्पताल के स्त्री रोग विभाग में सिजेरियन प्रसव से बच्चों को जन्म दिया था।
रेशमा का यह चौथा और अनीता का दूसरा सिजेरियन प्रसव था।
रेशमा की हालत बिगड़ने पर परिजन बृहस्पतिवार को उसे एक निजी अस्पताल ले गए। हालांकि, शुक्रवार शाम वे उसे वापस न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एनएमसीएच) ले आए, जहां देर रात उसकी मौत हो गई।
अनीता का अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में उपचार जारी है और उसकी हालत में सुधार बताया जा रहा है।
रेशमा के परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता का आरोप लगाया है।
रेशमा के पति मकसूद खान के अनुसार, उसे 13 अक्टूबर की शाम अस्पताल में भर्ती कराया गया था और अगले दिन सुबह करीब 10 बजे उसने सिजेरियन प्रसव से बच्चे को जन्म दिया।
परिजनों का आरोप है कि रेशमा को सामान्य वार्ड में स्थानांतरित करने और एक इंजेक्शन दिए जाने के तुरंत बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी।
उन्होंने दावा किया कि गंभीर जटिलताएं होने और पेशाब संबंधी परेशानी शुरू होने के बाद रेशमा का शरीर नीला पड़ गया।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि रेशमा की हालत गंभीर होने और डायलिसिस की जरूरत के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने शुरुआत में यह प्रक्रिया करने से इनकार कर दिया और उन्हें कहीं अन्य जगह उपचार कराने को कहा।
इसके बाद वे रेशमा को एक निजी अस्पताल ले गए और शुक्रवार को वापस एनएमसीएच ले आए।
परिजनों ने शुरुआत में मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराने की मांग की थी, लेकिन बाद में कोटा के चिकित्सकों से पोस्टमार्टम कराने पर सहमत हो गए।
भाषा शुभम शफीक
शफीक