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शिशुओं के आहार में ‘फ्रुक्टोज’ और ‘सुक्रोज’ मिलाने पर रोक लगाने प्रस्ताव

नयी दिल्ली, 17 अक्टूबर (भाषा) खाद्य नियामक एफएसएसएआई ने छह माह तक के शिशुओं के खाद्य उत्पादों में ‘फ्रुक्टोज’ और ‘सुक्रोज’ मिलाने पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव किया है। इसका मकसद शिशुओं को शुरुआती उम्र में अतिरिक्त चीनी के इस्तेमाल से बचाकर उनके स्वास्थ्य की रक्षा करना है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के बयान के अनुसार, इस प्रस्ताव का मकसद शिशुओं के पोषण संबंधी सुरक्षा उपायों को मजबूत करना है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) विनियम, 2020 में संशोधन का मसौदा जारी किया है। इसमें छह माह तक के शिशुओं के लिए बनाए जाने वाले खाद्य उत्पादों में ‘सुक्रोज’ और ‘फ्रुक्टोज’ मिलाने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है।

मसौदा अधिसूचना पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव एवं आपत्तियां मांगी गई हैं। इसके लिए 60 दिन का समय दिया गया है।

मौजूदा नियमों में जन्म से लेकर 24 माह तक के बच्चों के लिए विभिन्न श्रेणियों के शिशु पोषण उत्पादों की पोषण संरचना, गुणवत्ता और सुरक्षा के व्यापक मानक निर्धारित हैं।

वर्तमान प्रावधानों के तहत कार्बोहाइड्रेट के लिए लैक्टोज और ग्लूकोज पॉलिमर को प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर निर्धारित सीमाओं के अधीन सुक्रोज या फ्रुक्टोज मिलाने की अनुमति है।

मंत्रालय ने कहा, ‘‘जीवन के पहले छह महीने स्वस्थ वृद्धि और विकास के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में उचित पोषण विशेष रूप से जरूरी है। प्रस्तावित प्रतिबंध का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इस आयु वर्ग के शिशुओं के पोषण उत्पादों में सुक्रोज और फ्रुक्टोज अनावश्यक रूप से मिलाए बिना उनकी पोषण संबंधी जरूरतें पूरी की जाएं।’’

भाषा यासिर पाण्डेय

पाण्डेय