नयी दिल्ली, 17 अक्टूबर (भाषा) महिला संगठनों ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान महिलाओं और ट्रांसजेंडर प्रदर्शनकारियों के कथित यौन उत्पीड़न के आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर शनिवार को दिल्ली की सड़कों पर मार्च निकाला और ‘‘आप हमें धमका सकते हैं, लेकिन हमारी आवाज नहीं दबा सकते’’ के नारे लगाए।
महिला प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर दिल्ली पुलिस मुख्यालय की ओर बढ़ीं। उन्होंने निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान कथित यौन उत्पीड़न और लैंगिक हिंसा के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शनकारियों के हाथों में मौजूद एक तख्ती पर लिखा था, ‘‘महिलाएं मांगती हैं हर तरह के शोषण-दमन से मुक्ति।’’ उन्होंने महिलाओं और विभिन्न लैंगिक पहचान वाले लोगों के खिलाफ पुलिस की कथित ‘‘दमनकारी कार्रवाई और हिंसा’’ बंद करने की मांग की।
प्रदर्शनकारी गुरुद्वारा बंगला साहिब के पास एकत्र हुईं और उन्होंने कथित दुर्व्यवहार के लिए जिम्मेदारी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक एवं कानूनी कार्रवाई की मांग वाला ज्ञापन सौंपने के लिए वहां से दिल्ली पुलिस मुख्यालय की ओर मार्च किया।
समूह के एक सदस्य ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा कर बताया कि नारीवादी, समलैंगिक एवं अन्य लैंगिक पहचान वाले अल्पसंख्यकों तथा महिला संगठनों के एक प्रतिनिधिमंडल ने नयी दिल्ली में अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जगदेव सिंह से बातचीत की।
सदस्य ने कहा, ‘‘हमने दिल्ली पुलिस द्वारा महिलाओं, विभिन्न लैंगिक पहचान वाले लोगों और अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा रोकने के आदेश जारी किए जाने और सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की है।’’
संगठनों ने एक बयान में कहा कि वीडियो, तस्वीरों और पीड़ितों के बयानों से 20 जुलाई से पुलिस कार्रवाई के दौरान महिलाओं, ट्रांसजेंडर और अन्य लैंगिक पहचान वाले प्रदर्शनकारियों के कथित यौन उत्पीड़न एवं उनके साथ मारपीट की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने दावा किया कि दो अक्टूबर से ऐसी घटनाओं की खबरें बढ़ गई हैं।
संगठनों ने ऐसे वीडियो का हवाला दिया, जिनमें पुरुष पुलिसकर्मी महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत में लिए गए लोगों को ले जाने वाली बसों और हिरासत केंद्रों के अंदर भी यौन हिंसा की घटनाएं हुई हैं।
बयान के अनुसार, एक युवा महिला पत्रकार ने भी आरोप लगाया है कि सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) स्तर के एक अधिकारी ने उसके निजी अंगों को छुआ। इसमें दावा किया कि जब पत्रकार ने शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की तो उसे हिरासत में ले लिया गया और उसके एवं अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दी गई।
बयान में कहा गया, ‘‘अधिकारियों की जानबूझकर की गई ये कार्रवाइयां महिलाओं की आवाज दबाने की स्त्री-विरोधी कोशिशों के अलावा कुछ नहीं हैं। इससे महिलाओं को राजनीति और सार्वजनिक जीवन से बाहर करने की व्यापक मंशा का पता चलता है।’’
संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को जातिसूचक, सांप्रदायिक और लैंगिक आधार पर अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने अधिकारियों पर ऐसी घटनाओं को रोकने या जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया।
इस मार्च का आयोजन कई महिला और छात्र संगठनों ने मिलकर किया था। इनमें अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति, भारतीय महिला फेडरेशन, अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन, अखिल भारतीय महिला सांस्कृतिक संगठन (एआईएमएसएस), कलेक्टिव, अखिल भारतीय नारीवादी मंच, अखिल भारतीय कामकाजी महिला समन्वय समिति (एआईसीसीडब्ल्यू), प्रगतिशील महिला संगठन और पुरोगामी महिला संगठन शामिल हुए।
भाषा सिम्मी शफीक
शफीक