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सीआरपीएफ 30 साल पहले खत्म किए गए सेना के रैंक बहाल करने पर विचार कर रहा

नयी दिल्ली, 17 अक्टूबर (भाषा) देश का सबसे बड़ा अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ पदोन्नति में देरी की समस्या दूर करने और सेना से सेवानिवृत्त होने वाले ‘अग्निवीरों’ को समायोजित करने के लिए 30 साल पहले समाप्त किए गए लांस नायक और नायक के सैन्य रैंक बहाल करने पर विचार कर रहा है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि सीआरपीएफ मुख्यालय ने देशभर में बल की सैकड़ों क्षेत्रीय इकाइयों को दो दिन के भीतर संबंधित पक्षों के साथ बैठकें या ‘सैनिक सम्मेलन’ आयोजित करने और इस संबंध में जवानों के विचार जानने को कहा है।

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में लांस नायक और नायक के रैंक 1997 में समाप्त कर दिए गए थे और गृह मंत्रालय के एक आदेश के जरिए इन्हें पुलिस के कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल रैंक में मिला दिया गया था।

हालांकि, सेना में ये दोनों रैंक अब भी हैं।

पदानुक्रम के अनुसार, बल में कांस्टेबल के रूप में भर्ती होने वाले जवान को पांच साल में पहली पदोन्नति लांस नायक के पद पर मिलती है। इसके बाद 10 साल में नायक और फिर 20 साल में हेड कांस्टेबल के पद पर पदोन्नति मिलती है।

फिलहाल करीब 3.25 लाख कर्मियों वाले सीआरपीएफ में इन रैंक पर पदोन्नति में काफी लंबा समय लग रहा है। एक कांस्टेबल को औसतन 22 से 25 साल में पहली पदोन्नति मिलती है।

एक ही रैंक पर लंबे समय तक बने रहने के कारण जवानों में रोष है।

अधिकारियों ने कहा कि लांस नायक और नायक के रैंक दोबारा शुरू करने का उद्देश्य कांस्टेबल को हेड कांस्टेबल बनने से पहले पदोन्नति के दो अतिरिक्त अवसर देना है। इससे न केवल उनकी शिकायतों को दूर करने में मदद मिलेगी, बल्कि उनका मनोबल भी बढ़ेगा।

अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य सेना से आने वाले अग्निवीरों के लिए सीआरपीएफ में सेवा को आकर्षक बनाना भी माना जा रहा है। अग्निवीरों के पहले बैच के जवान इस साल के अंत में सेवानिवृत्त होने लगेंगे और वे सीआरपीएफ सहित केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में भर्ती होने के पात्र होंगे।

अग्निपथ योजना के तहत केंद्र सरकार तीनों सेनाओं में चार साल के लिए अग्निवीरों की भर्ती करती है। ये अल्पकालिक सेवा के लिए भर्ती किए गए सैन्यकर्मी होते हैं।

फिलहाल, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में कांस्टेबलों की वर्दी पर वरिष्ठ कांस्टेबल के पद का एक अस्थायी प्रतीक चिह्न लगाने की व्यवस्था है। हालांकि, यह पद आधिकारिक रूप से स्वीकृत नहीं है। इससे कांस्टेबलों को लांस नायक के रैंक के समकक्ष माना जाता है। फिलहाल, नायक रैंक के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।

पूर्व अर्धसैनिक कर्मी संघ के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा कि प्रस्तावित योजना से जवानों को तभी लाभ होगा, जब उन्हें निश्चित समय-सीमा के भीतर पदोन्नति मिलेगी, अन्यथा यह पूरी कवायद निरर्थक साबित होगी।

भाषा शफीक पवनेश

पवनेश