लखनऊ, 17 अक्टूबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य हासिल करने के लिए ईमानदार, तर्कशील और संवेदनशील विधिवेत्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
मुख्यमंत्री ने डॉक्टर राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए विद्यार्थियों से कहा, ''विकसित भारत के हर दावे के लिए तथ्य, साक्ष्य और तर्क चाहिए।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई व्यक्ति या राजनीतिक दल नहीं, बल्कि वह यथास्थितिवादी सोच है, जो बदलाव को असंभव मानती है।
उन्होंने विद्यार्थियों का ऐसी सोच का सामना तथ्यों, तर्कों और साक्ष्यों के आधार पर करने का आह्वान किया।
आदित्यनाथ ने डॉक्टर राम मनोहर लोहिया के एक आलेख का उल्लेख करते हुए कहा कि लोहिया का कहना था कि विधिवेत्ता का मस्तिष्क भगवान शिव जैसा, हृदय भगवान कृष्ण जैसा और वचन तथा कर्म भगवान राम जैसे होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि विधि के विद्यार्थियों में विवेक, संवेदनशीलता और मर्यादा का समन्वय होना जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने 2014 के बाद केंद्र सरकार द्वारा किए गए कानूनी सुधारों का जिक्र करते हुए कहा कि 1,500 से अधिक अप्रासंगिक कानून समाप्त किए गए।
उन्होंने जन विश्वास अधिनियम में 42 कानूनों के 183 प्रावधानों में छोटी-छोटी चूकों को अपराध के श्रेणी से बाहर किये जाने और अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि सुधार का अर्थ केवल नए कानून बनाना नहीं, बल्कि अप्रासंगिक कानूनों को हटाना भी है।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से देश के विकास, कानून के शासन और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
आदित्यनाथ ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डीपफेक और सीमा पार साइबर अपराधों को विधि के क्षेत्र की नयी चुनौतियां बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों को डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता और क्षेत्राधिकार से जुड़े सवालों के समाधान के लिए तैयार रहना होगा।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी जड़ों से जुड़े रहने और छुट्टियों में गांव जाकर जमीन तथा पारिवारिक विवादों के समाधान में योगदान देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि छोटे विवादों का समय रहते समाधान नहीं होने पर वे बड़े रूप ले सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को चार सुझाव देते हुए कहा कि वे नेतृत्व की भूमिका निभाएं, अपनी जड़ों से जुड़े रहें, शॉर्टकट अपनाकर अपनी साख दांव पर न लगाएं और कानून में होने वाले बदलावों से लगातार अवगत रहें।
उन्होंने कहा कि 'सत्यं वद:, धर्मम् चर:' को केवल अपने चैंबर की दीवार पर लिखने के बजाय अपने हृदय में लिखें।
भाषा सलीम नेत्रपाल जोहेब
जोहेब