Breaking News

मुंबई के कुर्ला में 13 मंजिला इमारत में लगी आग, 3 बच्चों समेत 9 लोग घायल     |   यूक्रेन: कीव में रूसी हवाई हमले में 3 लोगों की मौत, 6 घायल     |   कोलंबिया में सोने की खदान ढही, 6 मजदूरों की मौत; 12 से 15 लापता     |   टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के बाद बरेली में दिशा पाटनी के घर की सुरक्षा बढ़ाई गई     |  

भारत ने युवाओं के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई के आरोपों वाली संरा विशेषज्ञ की रिपोर्ट खारिज की

(योषिता सिंह)

संयुक्त राष्ट्र, 17 अक्टूबर (भाषा) भारत ने संयुक्त राष्ट्र की एक मानवाधिकार विशेषज्ञ की उस रिपोर्ट को ‘‘सुनी-सुनाई बातों’’ पर आधारित बताते हुए खारिज कर दिया, जिसमें देश के युवाओं द्वारा शुरू किए गए एक ‘‘व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन’’ का उल्लेख किया गया है।

भारत ने विशेषज्ञ से कहा कि वह अपुष्ट दावों के आधार पर किसी की छवि खराब करने से पहले तथ्यों की जांच करें।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव अनुज स्वरूप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति के 81वें सत्र में शांतिपूर्ण सभा करने और संगठन बनाने की स्वतंत्रता के अधिकारों से संबंधित विशेष प्रतिवेदक के साथ संवाद के दौरान भारत का पक्ष रखा।

स्वरूप ने ‘फ्रीडम ऑफ पीसफुल असेंबली एंड एसोसिएशन’ की विशेष प्रतिवेदक जीना रोमेरो की रिपोर्ट पर आपत्ति जताई। रोमेरो ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत में मानसिक स्वास्थ्य या लैंगिक न्याय के मुद्दों पर चर्चा करने वाले युवाओं को प्रतिशोधात्मक कार्रवाई या सामाजिक कलंक का सामना करना पड़ता है।

स्वरूप ने कहा कि रोमेरो ने अपने दावे के समर्थन में पृष्ठ के नीचे की गई टिप्पणी में ‘‘बिना नाम वाले दस्तावेजों’’ का हवाला दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी के खिलाफ अज्ञात स्रोतों से मिले अपुष्ट दावों के आधार पर इतने व्यापक आरोप लगाना कोई सबूत नहीं है। यह सुनी-सुनाई बातों को संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का रूप देने जैसा है और हमारा प्रतिनिधिमंडल इसे पूरी तरह खारिज करता है।’’

स्वरूप ने कहा, ‘‘कोई विशेष प्रतिवेदक जब ज्ञात स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर 1.4 अरब लोगों के बारे में सामान्य निष्कर्ष निकालती हैं, तो वह अपनी ही जिम्मेदारी के साथ न्याय नहीं करतीं। हम विशेष प्रतिवेदक से आग्रह करते हैं कि वह किसी को बदनाम करने से पहले तथ्यों की पुष्टि करें और अपनी रिपोर्ट में अपेक्षित गंभीरता एवं निष्पक्षता बरतें।’’

रोमेरो ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत के युवाओं ने एक ‘‘व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन’’ शुरू किया है। उनका इशारा ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) की ओर था। उन्होंने रिपोर्ट में यह भी कहा कि ‘‘भारत के युवाओं ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य या लैंगिक न्याय पर चर्चा करने के कारण उन्हें प्रतिशोधात्मक कार्रवाई या सामाजिक कलंक का सामना करना पड़ा।’’

स्वरूप ने कहा, ‘‘इस तरह मनमाने ढंग से रिपोर्ट तैयार करना ही वह कारण है, जिसकी वजह से संयुक्त राष्ट्र और उसकी संस्थाओं की विश्वसनीयता खत्म हुई है।’’

उन्होंने कहा कि भारत में शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और संगठन बनाने की आजादी के साथ ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत प्रत्येक नागरिक को दी गई है। इन अधिकारों की रक्षा स्वतंत्र न्यायपालिका, स्वतंत्र प्रेस और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग करता है।

भारत ने इस बात को भी विडंबनापूर्ण बताया कि रिपोर्ट में देश के युवाओं द्वारा शुरू किए गए ‘‘व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन’’ का उल्लेख किया गया है।

स्वरूप ने कहा, ‘‘ऐसा कौन सा दमनकारी देश होगा, जहां युवाओं की एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक पार्टी सरकार से सवाल करती है, राष्ट्रीय राजधानी में मार्च निकालती है और फिर देश के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकर बातचीत करती है?’’

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जो उन्होंने पिछले महीने मानवाधिकार परिषद में भारत में युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलन के संदर्भ में की थी। उच्चायुक्त ने कहा था कि युवा नेताओं के साथ बातचीत करना कहीं अधिक प्रभावी होता है।

स्वरूप ने कहा, ‘‘शायद यह जानकारी विशेष प्रतिवेदक के ध्यान में नहीं आई।’’

उन्होंने कहा कि इस साल गर्मियों में जब छात्रों ने प्रवेश परीक्षाओं में अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन किया, तो सरकार ने युवाओं के साथ सकारात्मक बातचीत की।

स्वरूप ने बताया कि कुछ ही सप्ताह के भीतर भारतीय संसद ने लोक परीक्षा अधिनियम में संशोधन कर प्रश्नपत्र लीक करने के मामलों में सजा दोगुनी कर दी। इसके अलावा परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार किए गए और परीक्षा संबंधी धोखाधड़ी में शामिल लोगों के खिलाफ मुकदमों की सुनवाई के लिए प्रत्येक राज्य में विशेष त्वरित अदालतें स्थापित की गईं।

उन्होंने कहा, ‘‘यह इस बात का सच्चा प्रमाण है कि लोकतंत्र किस तरह काम करता है। युवा हमारी ताकत और साझा भविष्य हैं।’’

स्वरूप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस कथन का भी उल्लेख किया कि युवाओं की क्षमता भारत की क्षमता बनेगी और उनकी सफलता देश की सफलता को नयी ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस साल 50 लाख से अधिक युवाओं ने ‘विकसित भारत युवा नेता संवाद’ में भाग लिया और प्रधानमंत्री के साथ सीधे संवाद कर राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को तय करने में योगदान दिया।

स्वरूप ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सहित कई मंत्री देश के युवाओं से सीधे और सोशल मीडिया के जरिए लगातार संवाद करते हैं।

भाषा सिम्मी सुभाष

सुभाष