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मणिपुर को इतनी सुरक्षा की जरूरत थी:दिल्ली में प्रदर्शनों के मद्देनजर पुलिस तैनाती पर तृणमूल का तंज

कोलकाता, 17 अक्टूबर (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती पर सवाल उठाते हुए पूछा कि तीन साल से अधिक समय से जातीय हिंसा से प्रभावित मणिपुर में इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को क्यों नहीं तैनात किया गया।

ममता बनर्जी गुट से जुड़े घोष ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के विपक्ष पर बांग्लादेश की तर्ज पर सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने और युवाओं की ऊर्जा का इस्तेमाल ‘अराजकता’ फैलाने के लिए करने के आरोप पर पलटवार करते हुए कहा कि युवा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती दर्शाती है कि सरकार उनके सवालों का जवाब देने में असमर्थ है।

ममता बनर्जी नीत तृणमूल के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘ हम अराजकता का समर्थन नहीं करते। लेकिन जब नयी पीढ़ी किसी मुद्दे पर सवाल पूछती है, तो उन्हें समझाना आपकी जिम्मेदारी है।’’

घोष ने कहा, ‘‘आपके पास इतनी बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल हैं। उन्हें युवाओं के खिलाफ क्यों तैनात किया जा रहा है? आपको इतनी ही संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल मणिपुर भेजने चाहिए थे। अगर आपने उन्हें सही समय पर मणिपुर भेजा होता, तो वहां की समस्या का समाधान हो गया होता।’’

मणिपुर में मेइती और कुकी समुदायों के बीच मई 2023 में जातीय संघर्ष शुरू हुआ था। इस संघर्ष में अब तक कम से कम 306 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं।

राज्य में इस साल फरवरी से कुकी और नगा समुदायों के बीच हुई झड़पों में करीब 50 लोगों की मौत हो चुकी है।

घोष की यह टिप्पणी राष्ट्रीय राजधानी में विपक्षी दलों और युवा समूहों के उन विरोध-प्रदर्शनों के बीच आई है, जिसमें एसआईआर में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है।

भाषा जितेंद्र शोभना

शोभना