नयी दिल्ली, 17 अक्टूबर (भाषा) महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान महिलाओं और ट्रांसजेंडर प्रदर्शनकारियों के कथित यौन उत्पीड़न के आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर शनिवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकाला।
वामपंथी महिला संगठनों की कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर कथित यौन उत्पीड़न और लैंगिक हिंसा के खिलाफ नारे लगाए। उन्होंने कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की।
प्रदर्शनकारी गुरुद्वारा बंगला साहिब के पास एकत्र हुए और उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित यौन एवं लैंगिक हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपने के लिए वहां से दिल्ली पुलिस मुख्यालय की ओर मार्च किया।
संगठनों ने अपनी अपील में कहा, ‘‘जो लोग भी दोषी पाए जाएं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाए और कानून के तहत सजा दी जाए।’’
उन्होंने कथित यौन उत्पीड़न के आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की मांग की।
महिला संगठनों ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि वीडियो, तस्वीरों और पीड़ितों के बयानों में 20 जुलाई से पुलिस कार्रवाई के दौरान महिला, ट्रांसजेंडर और अन्य प्रदर्शनकारियों के कथित यौन उत्पीड़न एवं उनसे शारीरिक हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने दावा किया कि दो अक्टूबर से ऐसी घटनाओं की खबरें बढ़ गई हैं।
संगठनों ने ऐसे वीडियो का हवाला दिया, जिनमें पुरुष पुलिसकर्मी महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत में लिए गए लोगों को ले जाने वाली बसों और हिरासत केंद्रों के अंदर भी यौन हिंसा की घटनाएं हुई हैं।
बयान के अनुसार, एक युवा महिला पत्रकार ने भी आरोप लगाया है कि सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) स्तर के एक अधिकारी ने उसके निजी अंगों को छुआ।
संगठनों ने बयान में दावा किया कि जब पत्रकार ने शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की तो उसे हिरासत में ले लिया गया और उसके एवं अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दी गई।
बयान में कहा गया, ‘‘अधिकारियों की जानबूझकर की गई ये कार्रवाइयां महिलाओं की आवाज दबाने की स्त्री-विरोधी कोशिशों के अलावा कुछ नहीं हैं। इससे महिलाओं को राजनीति और सार्वजनिक जीवन से बाहर करने की व्यापक मंशा का पता चलता है।’’
संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को जातिसूचक, सांप्रदायिक और लैंगिक आधार पर अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने अधिकारियों पर ऐसी घटनाओं को रोकने या दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया।
भाषा सिम्मी शोभना
शोभना