लखनऊ, 16 अक्टूबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने शुक्रवार को राज्य सरकार को प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नवजात शिशुओं और बच्चों के इलाज की सुविधाएं बेहतर बनाने के लिए व्यापक रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इसमें अन्य मरीजों के लिए भी आवश्यक सुविधाएं, पर्याप्त वेंटिलेटर और विशेष वेंटिलेटर की व्यवस्था शामिल होनी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने आशुतोष कुमार सिंह की जनहित याचिका समेत अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि प्रदेश के 45 सरकारी मेडिकल कॉलेजों के लिए रोडमैप तैयार करने में संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) और किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) जैसे विशेषज्ञ संस्थानों के सुझाव लिए जाएं।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि इटावा, औरैया, कन्नौज, मैनपुरी और फिरोजाबाद में पायलट परियोजना के तहत ई-सारथी डिजिटल रेफरल प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है। इसके तहत सैफई स्थित मेडिकल कॉलेज को रेफरल अस्पताल बनाया गया है। सफल रहने और जरूरी संशोधनों के बाद इसे अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा।
अदालत ने सुल्तानपुर के राजकीय स्वायत्त मेडिकल कॉलेज में नवजात की कथित तौर पर समय पर वेंटिलेटर, ऑक्सीजन और विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध न होने से हुई मौत के मामले में राज्य सरकार से पूछा कि जांच के तथ्यों के आधार पर पीड़ित परिवार को मुआवजा क्यों न दिया जाए। मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी।
भाषा सं आनन्द रंजन
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