लखनऊ, 16 अक्टूबर (भाषा) युवा पीढ़ी (जेन जी) के विरोध प्रदर्शनों और अयोध्या में राम मंदिर के लिए दिए गए चढ़ावे में कथित हेराफेरी जैसे मुद्दों के बावजूद उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर लोगों की सकारात्मक राय से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को चुनावी बढ़त मिलती दिख रही है। एक सर्वेक्षण में यह जानकारी सामने आई है।
हालांकि, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले रोजगार से जुड़ी चिंताएं उसके लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। ‘न्यूज18 नेटवर्क’ के एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है।
विपक्ष ने इस सर्वेक्षण को खारिज करते हुए 2027 के विधानसभा चुनाव में ‘इंडिया’ गठबंधन की जीत का दावा किया, जबकि प्रदेश भाजपा ने सर्वेक्षण के व्यापक निष्कर्षों का श्रेय अपने नेतृत्व को दिया।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने अपने आधिकारिक ''एक्स'' पर एक पोस्ट में कहा कि ''हर सर्वे बता रहे, तीसरी बार भाजपा सरकार।''
उन्होंने आगे कहा ''विभिन्न न्यूज चैनलों के सर्वे में भी उत्तर प्रदेश में प्रचंड बहुमत से तीसरी बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन रही है। उत्तर प्रदेश की जनता का आशीर्वाद भाजपा को मिल रहा है।''
चौधरी ने कहा कि ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के निर्देशन में उत्तर प्रदेश भाजपा दिन रात एक कर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उप्र में डबल इंजन सरकार जन-जन की अपेक्षाओं की पूर्ति के लिए कार्य कर रही है।''
भाजपा नेता ने कहा ''हमारे देवतुल्य कार्यकर्ता अपने तपोबल के दम पर तीसरी बार भाजपा सरकार बनाने के लिए संकल्पित हैं। 2027 में भाजपा लगाएगी हैट्रिक...।''
यह सर्वेक्षण राज्य के सभी 75 जिलों में 17 सितंबर से दो अक्टूबर के बीच 30,925 लोगों के बीच किया गया। इसके अनुसार, 66.6 प्रतिशत लोग भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को वोट देने के पक्ष में थे, जबकि 26.4 प्रतिशत ने समाजवादी पार्टी (सपा)-कांग्रेस गठबंधन और 5.4 प्रतिशत ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का समर्थन किया।
यह पूछे जाने पर कि अगली सरकार किस गठबंधन की बनेगी, 66.6 प्रतिशत लोगों ने भाजपा के नेतृत्व वाले राजग के पक्ष में राय दी, जबकि 26.5 प्रतिशत ने सपा-कांग्रेस गठबंधन का समर्थन किया। वहीं, 65.2 प्रतिशत लोगों का मानना था कि भाजपा को राज्य में लगातार तीसरी बार सत्ता में आना चाहिए।
सर्वेक्षण में मुख्यमंत्री पद के लिए योगी आदित्यनाथ सबसे पसंदीदा विकल्प के रूप में उभरे। उन्हें 66.2 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला, जबकि सपा प्रमुख अखिलेश यादव को 24.4 प्रतिशत लोगों ने पसंद किया। कुल मिलाकर 77.1 प्रतिशत लोगों ने राज्य सरकार के कामकाज पर संतोष जताया, जबकि 13.5 प्रतिशत ने असंतोष व्यक्त किया। सर्वेक्षण में शासन के सात मानकों का आकलन किया गया।
इनमें कानून-व्यवस्था को सबसे अधिक 74 प्रतिशत संतुष्टि मिली। इसके बाद बुनियादी ढांचे को 68.6 प्रतिशत और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को 66.3 प्रतिशत लोगों ने संतोषजनक बताया।
कुल 33.4 प्रतिशत लोगों ने कानून-व्यवस्था को मतदान का सबसे अहम मुद्दा बताया। इस मोर्चे पर सरकार के कामकाज से संतुष्ट लोगों का अनुपात मौजूदा भाजपा-राजग समर्थकों में 89.6 प्रतिशत था, जबकि सपा-कांग्रेस और बसपा समर्थकों में यह लगभग 43 प्रतिशत रहा।
सर्वेक्षण के अनुसार, भाजपा-राजग समर्थकों के बीच एकजुटता दिखाई दी। इनमें से 94.7 प्रतिशत लोग आदित्यनाथ सरकार के कामकाज से संतुष्ट थे, 93.3 प्रतिशत ने उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी पहली पसंद बताया और 93.2 प्रतिशत का मानना था कि भाजपा को तीसरा कार्यकाल मिलना चाहिए।
इसके अलावा, मौजूदा भाजपा-राजग समर्थकों में से 95.4 प्रतिशत को भरोसा था कि यही गठबंधन अगली सरकार बनाएगा। सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि भाजपा अपने पुराने समर्थकों का बड़ा हिस्सा अपने साथ बनाए रखने में सफल रही है। वर्ष 2022 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को वोट देने वाले लगभग 91 प्रतिशत लोग अब भी पार्टी या गठबंधन का समर्थन कर रहे हैं।
सपा-कांग्रेस खेमे में पुराने समर्थकों को बनाए रखने की दर लगभग 83 से 85 प्रतिशत रही। हालांकि, पिछले चुनावों की तुलना में इस गठबंधन के समर्थन में सुधार हुआ है। सर्वेक्षण के मुताबिक, उसका मौजूदा समर्थन 2022 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले 3.7 प्रतिशत अंक और 2024 के लोकसभा चुनाव के मुकाबले 2.4 प्रतिशत अंक अधिक है। रोजगार के मुद्दे पर कम संतुष्टि
सरकार के कामकाज के विभिन्न मानकों में रोजगार सबसे कमजोर पक्ष रहा। इस मुद्दे पर 58.3 प्रतिशत लोगों ने संतुष्टि जताई। बेरोजगार लोगों में यह आंकड़ा घटकर 50.7 प्रतिशत रह गया, जबकि भूमिहीन और अकुशल श्रमिकों में यह लगभग 52 से 53 प्रतिशत था।
यहां तक कि भाजपा-राजग समर्थकों में भी रोजगार के मुद्दे पर संतुष्टि का स्तर 74.5 प्रतिशत रहा, जो कानून-व्यवस्था, बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को मिली संतुष्टि से कम था।
सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की सरकार के कामकाज को लेकर राय काफी हद तक समान थी। क्षेत्रीय स्तर पर रुहेलखंड में लगभग सभी मानकों पर संतुष्टि का स्तर सबसे अधिक या उसके करीब रहा।
राम मंदिर के लिए दिए गए चंदे की कथित हेराफेरी के मामले में 31.2 प्रतिशत लोगों ने मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। इसके बाद 20.6 प्रतिशत ने कर्मचारियों और ठेकेदारों तथा 13.7 प्रतिशत ने राज्य सरकार को इसके लिए जिम्मेदार माना।
सर्वेक्षण में हाल में जेन जी के विरोध प्रदर्शनों और महंगाई तथा परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने जैसे सार्वजनिक चर्चा के अन्य मुद्दों पर भी लोगों की राय जानी गई।
सपा के राष्ट्रीय सचिव अरविंद सिंह ‘गोप’ ने कहा कि बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, किसानों के मुद्दे और अयोध्या में राम मंदिर के चंदे की कथित हेराफेरी 2027 में भाजपा के पतन का कारण बनेंगे। उन्होंने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों से भी बेहतर रहेगा।
गोप ने कहा कि समाजवादी पार्टी 2024 के लोकसभा चुनावों की तुलना में कहीं बेहतर प्रदर्शन करेगी।
उन्होंने तर्क दिया कि लोग आज भी अखिलेश यादव की सरकार के दौरान शुरू की गई विकास योजनाओं को याद करते हैं, जिनमें लैपटॉप वितरण योजना, लोहिया आवास, कैंसर संस्थान और एकाना स्पोर्ट्स स्टेडियम शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि सपा ने हर क्षेत्र में काम किया है और लोग अब उनके योगदान को मानते हैं।
गोप ने कहा, 'जो लोग भगवान को भी धोखा दे सकते हैं, उन पर कोई कैसे भरोसा कर सकता है?' उन्होंने यह बात अयोध्या राम मंदिर के लिए दिए गए चंदे में कथित चोरी के मामले के संदर्भ में कही। यह मुद्दा तब चर्चा में आया जब सात जून को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे उठाया था।
सर्वेक्षण के लिए सभी 75 जिलों में जनसंख्या के अनुपात में उत्तरदाताओं का चयन किया गया। इसमें ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों को शामिल किया गया। कंप्यूटर आधारित व्यक्तिगत साक्षात्कार (सीएपीआई) और एक संरचित प्रश्नावली के माध्यम से घर-घर जाकर लोगों से आमने-सामने बातचीत की गई।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव फरवरी-मार्च 2027 में प्रस्तावित है।
भाषा किशोर, मनीष, आनन्द रंजन
रंजन