प्रयागराज, 16 अक्टूबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश की अदालतों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि भरण पोषण के मामलों में निष्पादन अर्जियों का निपटारा छह महीने के भीतर कर दिया जाए।
अदालत ने सख्त चेतावनी दी कि इस निर्देश का अनुपालन नहीं करना उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय दोनों की अवमानना के समान हो सकता है।
न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की पीठ ने कहा, “उत्तर प्रदेश के अधिकार क्षेत्र में आने वाली सभी अदालतों को माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों और इस अदालत के महानिबंधक द्वारा 24 मई, 2025 को जारी सर्कुलर का अनुपालन करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाता है कि भरण पोषण के मामलों में निष्पादन अर्जियों का निस्तारण छह महीने के भीतर कर दिया जाए।”
अदालत ने दाता राम (पति) नाम के एक व्यक्ति द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए यह निर्देश जारी किया। याचिकाकर्ता ने भरण पोषण के एक मामले में कासगंज की परिवार अदालत के प्रधान न्यायाधीश द्वारा जारी सितंबर, 2024 के आदेश को चुनौती दी थी।
इस आदेश में परिवार अदालत ने पति को अपनी पत्नी को प्रतिमाह 3,000 रुपये और अपने दो नाबालिग बच्चों को बालिग होने तक प्रतिमाह 1,000-1,000 रुपये गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया था। यह गुजारा भत्ता आवेदन की मूल तिथि 18 अप्रैल, 2022 से देय था।
अदालत ने लगभग 645 दिनों की अत्यधिक देरी को माफ करने से इनकार कर दिया और देरी के लिए दिए गए कारणों को अपर्याप्त मानते हुए पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।
भाषा सं राजेंद्र रंजन
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