कुल्लू (हिमाचल प्रदेश), 16 अक्टूबर (भाषा) हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में जलावन की भारी किल्लत के कारण मनाली, तीर्थन और पार्वती घाटियों में संकट पैदा हो गया है। सर्दियों की शुरुआत से ठीक पहले आम परिवारों के साथ-साथ होटल कारोबार से जुड़े लोग ईंधन जुटाने के लिए भारी मशक्कत कर रहे हैं।
स्थानीय निवासियों और होटल कारोबारियों के अनुसार, यह संकट वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर (रसोई गैस सिलेंडर) की किल्लत से और अधिक गहरा गया है। इसके कारण होटलों को खाना पकाने के लिए लकड़ी, कोयले और डीजल बर्नर का सहारा लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है, जबकि सरकारी जलावन डिपो ने आपूर्ति को सीमित कर दिया है।
कुल्लू अपनी पारंपरिक शीतकालीन संस्कृति के लिए जाना जाता है, जो 'बुखारी' (लकड़ी से जलने वाली धातु की अंगीठी) के इर्द-गिर्द केंद्रित है। इस अंगीठी का उपयोग सर्दी से बचने के साथ-साथ खाना पकाने के लिए भी किया जाता है।
मनाली के एक होटल मालिक संजय दत्ता ने बताया कि एलपीजी की कमी के बीच मनाली के 4,000 से अधिक पंजीकृत होटलों और जीभी-तीर्थन क्षेत्र के 1,000 से अधिक होटलों पर वैकल्पिक ईंधन अपनाने का दबाव बढ़ गया है।
होटल कारोबारियों ने कहा कि उनका मासिक ईंधन खर्च तीन लाख रुपये को पार कर गया है, जिससे उन्हें भोजन के दामों में 20 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने वाणिज्यिक एलपीजी की मांग को पूरा करने में आ रही कठिनाइयों की बात स्वीकार की है।
जलावन की किल्लत ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। शमशी और आसपास के इलाकों में हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम के लकड़ी एवं जलावन बिक्री डिपो ने आपूर्ति को सीमित कर दिया है।
भाषा सुमित रंजन
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