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राज्य सरकार अस्थायी न्यासी से मंदिर की संपत्ति उपहार में नहीं ले सकती: उच्चतम न्यायालय

नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि कोई राज्य सरकार किसी अस्थायी न्यासी से मंदिर की संपत्ति उपहार के रूप में कानूनी तौर पर प्राप्त नहीं कर सकती।

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने कहा कि सरकार संरक्षक होने के नाते उन धार्मिक और धर्मार्थ संस्थाओं की संपत्ति पर मनमाने ढंग से कब्जा नहीं कर सकती, जिनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उस पर है। पीठ ने कहा कि साथ ही, वह अपने किसी भी अधिकारी को ऐसी संपत्ति पर अवैध कब्जा करने की अनुमति भी नहीं दे सकती।

उच्चतम न्यायालय का यह फैसला तमिलनाडु के नागापालयम मरियम्मन-पोन्नाचियम्मन मंदिर की जमीन के मालिकाना हक से संबंधित याचिका पर आया।

इस मामले में, तमिलनाडु के इरोड जिले के कोडुमुडी गांव में सर्वे नंबर 36/4, 36/5 और 41/2 के अंतर्गत आने वाली एक एकड़ और दस सेंट जमीन नागापालयम मरियम्मन-पोन्नाचियम्मन मंदिर की थी और इसका प्रबंधन मंदिर ट्रस्ट द्वारा किया जाता था।

तहसीलदार ने 30 अगस्त, 2017 को एक प्रमाणपत्र जारी किया, जिसमें कहा गया था कि एस. भूपति (मंदिर के अस्थायी न्यासी) ने मंदिर की जमीन सरकार को दे दी है।

इसी तारीख से अस्थायी न्यासी ने संबंधित जमीन तमिलनाडु सरकार को दे दी। इस मामले में सरकार का प्रतिनिधित्व जिलाधिकारी और तहसीलदार कर रहे थे। तहसीलदार ने जमीन पर तालुक कार्यालय के निर्माण के लिए यह दान स्वीकार कर लिया।

उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि संबंधित जमीन के संरक्षक के रूप में कार्य करना सरकार का वैधानिक दायित्व था।

पीठ ने कहा, ‘‘हालांकि, सरकार ने न केवल मंदिर की संपत्ति का उपहार स्वीकार किया, बल्कि उच्च न्यायालय और इस अदालत के समक्ष भी उसका बचाव करता रहा। यह सिलसिला तब तक जारी रहा, जब तक बंदोबस्ती विभाग के मुख्य सचिव से हलफनामे के जरिए उनका पक्ष रखने को नहीं कहा गया। इसलिए, हम सरकार को निर्देश देना उचित समझते हैं कि वह आठ सप्ताह के भीतर मंदिर को एक लाख रुपये हर्जाने के रूप में अदा करे।’’

शीर्ष अदालत ने कहा कि देश के धार्मिक संस्थानों के पास सदियों से संचित अपार संपत्ति, जमीन, इमारतें और आभूषण हैं और ये संपत्तियां आम श्रद्धालुओं के चढ़ावे तथा राजाओं और आम लोगों, दोनों द्वारा दिये गये दान से एकत्र हुई हैं।

भाषा देवेंद्र पवनेश

पवनेश