नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (भाषा) विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) के अनुसार, वर्ष 2015 से 2025 के दौरान चारधाम क्षेत्र में हुई हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं के ज्यादातर मामलों में चालक दल द्वारा मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन नहीं करना प्रमुख कारण रहा।
इसके अलावा, प्रतिकूल मौसम और अधिक ऊंचाई पर उड़ान के दौरान निर्णय लेने में हुई चूक भी दुर्घटनाओं की वजह बनीं।
एएआईबी के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला कि इस दस वर्षीय अवधि में चारधाम क्षेत्र में हेलीकॉप्टरों से जुड़ी कुल नौ घटनाएं हुईं। इनमें आठ दुर्घटनाएं और एक गंभीर घटना शामिल थी। वर्ष 2022 से हर साल कम से कम एक दुर्घटना या गंभीर घटना दर्ज की गई।
एएआईबी ने जून 2025 में उत्तराखंड में हुए हेलीकॉप्टर हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट में कहा, “आठ दुर्घटनाओं में से पांच जानलेवा थीं। वर्ष 2015 और 2016 में कोई दुर्घटना नहीं हुई, क्योंकि उस दौरान चारधाम क्षेत्र में हेलीकॉप्टरों का संचालन बहुत सीमित था।”
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017 से 2019 के बीच दो दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें से एक जानलेवा थी। कोविड-19 संबंधी प्रोटोकॉल के कारण वर्ष 2020 और 2021 में हेलीकॉप्टरों का संचालन काफी सीमित रहा। इस दौरान कोई दुर्घटना दर्ज नहीं की गई।
एएआईबी ने बताया कि वर्ष 2025 में चारधाम क्षेत्र में चार हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं हुईं, जो एक वर्ष में दर्ज दुर्घटनाओं की सर्वाधिक संख्या है। ये सभी दुर्घटनाएं मई और जून के दौरान हुईं। इनमें से दो दुर्घटनाएं जानलेवा थीं। जून 2025 में हुए एक हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी।
रिपोर्ट में कहा गया कि दुर्घटनाओं के संभावित कारणों और उनमें योगदान देने वाले कारकों का विश्लेषण किया गया, ताकि उनकी प्रकृति को समझा जा सके। विश्लेषण में पाया गया कि ज्यादातर दुर्घटनाएं हेलीकॉप्टर संचालन से संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया का पालन नहीं करने, प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों और अधिक ऊंचाई पर उड़ान के दौरान निर्णय लेने में हुई चूक के कारण हुईं।
उत्तराखंड में 15 जून, 2025 को आर्यन एविएशन का बेल 407 हेलीकॉप्टर (वीटी-बीकेए) श्री केदारनाथ से गुप्तकाशी के बीच शटल उड़ान संचालित करते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी।
भाषा संतोष रंजन
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