नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (भाषा) विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजनीतिक दलों और अन्य संगठनों के विरोध प्रदर्शनों के बीच दिल्ली में निर्वाचन अधिकारियों ने उन 47 लाख से अधिक मतदाताओं के नामों का फिर से सत्यापन शुरू कर दिया है, जिन्हें मसौदा सूची से हटा दिया गया था।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) अशोक कुमार ने संवाददाताओं से कहा कि बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) ने मसौदा सूची से हटाए गए मतदाताओं के नामों का दोबारा सत्यापन शुरू कर दिया है, ताकि एसआईआर के दौरान कोई भी पात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न रह जाए।
दिल्ली में एसआईआर की प्रक्रिया 30 जून को मतदाताओं द्वारा गणना प्रपत्र भरने के साथ शुरू हुई थी। गणना चरण पूरा होने के बाद दिल्ली की सभी 70 विधानसभा सीटों की मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की गई, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी के कुल 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47.5 लाख के नाम शामिल नहीं थे।
दोबारा सत्यापन का यह कदम 31 अगस्त को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची से कई ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए जाने की शिकायतों के बीच उठाया जा रहा है, जो अपने पंजीकृत पते पर ही रह रहे थे।
कुमार ने बताया कि जिन 33.12 लाख मामलों में मतदाताओं को तार्किक विसंगति के कारण नोटिस जारी किए गए थे, उनमें से लगभग 25 लाख मामलों का निपटारा कर दिया गया है।
कुमार ने पत्रकारों से कहा, ‘‘बूथ-स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे उन मतदाताओं का फिर से सत्यापन करें, जिनके नाम गणना चरण के बाद जारी की गई मतदाता सूची के मसौदे में नहीं थे। हमारी कोशिश यह सुनिश्चित करने की है कि चार दिसंबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची में किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम न छूटे।’’
उन्होंने कहा कि मसौदा मतदाता सूची में जिन मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, वे चार दिसंबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 भर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि बीएलओ को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि विवरण में मामूली गलतियां होने पर मतदाताओं के आवेदनों को सीधे खारिज नहीं किया जाए।
एसआईआर के गणना चरण के बाद 47.5 लाख के नाम मसौदा मतदाता सूची से ‘एएसडीडी’ श्रेणी के तहत हटा दिए गए थे। इनमें अनुपस्थित, विस्थापित, मृत और नाम में दोहराव वाले मतदाता शामिल थे।
सबसे अधिक 43.3 लाख मतदाताओं को अनुपस्थित या स्थायी रूप से स्थानांतरित पाया गया। मृत मतदाताओं की संख्या 2.82 लाख, जबकि दोहरी प्रविष्टि वाले मतदाताओं की संख्या 1.41 लाख थी।
मसौदा मतदाता सूची में शामिल 97.53 लाख मतदाताओं में से 33.12 लाख को तार्किक विसंगतियों, जैसे व्यक्तिगत विवरण में त्रुटियों या 2002 के एसआईआर की मतदाता सूची से नाम नहीं जुड़ने के कारण नोटिस जारी किए गए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि नोटिस पाने वाले सभी 33.12 लाख मतदाताओं के मामलों का निपटारा 30 अक्टूबर तक कर दिया जाएगा।
भाषा आशीष अविनाश
अविनाश