शिमला, 16 अक्टूबर (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने हिमाचल प्रदेश में मानसून के दौरान आई आपदा और कथित पर्यावरणीय उल्लंघन से जुड़े मामले की सुनवाई के लिए निर्देश दिए जाने के बावजूद राज्य के नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के प्रधान सचिव के डिजिटल माध्यम से उपस्थिति नहीं होने को गंभीरता से लिया है।
अधिकरण ने हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई में प्रधान सचिव की डिजिटल माध्यम से उपस्थिति सुनिश्चित करें।
एनजीटी ने मंगलवार को आदेश पारित किया था और विस्तृत आदेश की प्रति शुक्रवार को उपलब्ध हुई।
अधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ‘द हिंदू’ समाचारपत्र में 25 नवंबर, 2023 को प्रकाशित एक खबर के आधार पर दायर मूल आवेदन पर सुनवाई कर रही थी। खबर का शीर्षक था, ‘हिमाचल प्रदेश में मानसून की तबाही के पीछे वनों की कटाई, अव्यवस्थित निर्माण और अवैज्ञानिक अवैध खनन’।
चार अगस्त, 2026 के अपने आदेश में नयी दिल्ली स्थित अधिकरण ने कहा था कि हिमाचल प्रदेश सरकार के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ, जिनमें मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और वन एवं पर्यावरण से संबंधित वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। उनकी अनुपस्थिति के कारण उस दिन प्रभावी ढंग से सुनवाई नहीं हो सकी थी।
मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश देने के बजाय अधिकरण ने प्रधान सचिव को 13 अक्टूबर, 2026 को डिजिटल माध्यम से उपस्थित होने का निर्देश दिया था। अधिकरण ने यह भी कहा कि कार्यवाही में शामिल होने में किसी तरह की कठिनाई होने के संबंध में उनकी ओर से कोई आवेदन दाखिल नहीं किया गया था।
अपने पिछले आदेश का प्रथम दृष्टया अनुपालन नहीं किए जाने पर गौर करते हुए पीठ ने अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए नए निर्देश देना आवश्यक समझा। पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि प्रधान सचिव उपस्थित नहीं होते हैं, तो मुख्य सचिव को अधिकरण की सहायता के लिए डिजिटल माध्यम से उपस्थित होना होगा।
मामले की अगली सुनवाई 22 जनवरी, 2027 को होगी।
भाषा गोला नेत्रपाल
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