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ओडिशा छात्रसंघ चुनाव : एबीवीपी ने 13 में से आठ विश्वविद्यालयों में जीत का दावा किया

भुवनेश्वर, 16 अक्टूबर (भाषा) अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने शुक्रवार को दावा किया कि ओडिशा में आठ साल बाद हुए छात्रसंघ चुनावों में उसने राज्य के 13 विश्वविद्यालयों में से आठ में जीत हासिल की है।

इस बीच, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि यह नतीजा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति युवाओं के विश्वास को दर्शाता है।

वहीं, विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) से संबद्ध बीजू छात्र जनता दल (बीसीजेडी) ने कहा कि उसके उम्मीदवारों ने 55 से 60 प्रतिशत सीट पर जीत हासिल की है।

कांग्रेस के छात्र संगठन भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने दावा किया कि उसने 30 कॉलेजों में अध्यक्ष पद जीते हैं और 80 अन्य संस्थानों में दूसरे स्थान पर रहा है।

राज्य में छात्रसंघ चुनाव राजनीतिक दलों के आधार पर नहीं होते, लेकिन राजनीतिक दल उम्मीदवारों का समर्थन करते हैं।

एबीवीपी की प्रदेश सचिव दीप्तिमयी प्रतिहारी ने दावा किया कि संगठन ने 13 विश्वविद्यालयों में से आठ में जीत हासिल की। उसने अध्यक्ष के आठ, उपाध्यक्ष के आठ, सचिव के 10 और सहायक महासचिव के 11 पदों पर जीत दर्ज की।

उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के छात्र संगठन एबीवीपी ने उत्कल विश्वविद्यालय में सभी पदों पर जीत हासिल की, जबकि रेवेन्शॉ विश्वविद्यालय में अध्यक्ष पद को छोड़कर बाकी सभी पदों पर जीत दर्ज की।

प्रतिहारी ने कहा कि रामादेवी महिला विश्वविद्यालय में संगठन को हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने प्रतिद्वंद्वी संगठनों पर धनबल और बाहुबल का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

एबीवीपी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि बीसीजेडी ने पांच विश्वविद्यालयों में अध्यक्ष पद और एक विश्वविद्यालय में महासचिव पद पर जीत हासिल की। पोस्ट में यह भी कहा गया कि एनएसयूआई ने एक विश्वविद्यालय में महासचिव पद जीता, जबकि अध्यक्ष पद पर उसे कहीं जीत नहीं मिली।

बीसीजेडी की अध्यक्ष इप्सिता साहू ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘बीसीजेडी के उम्मीदवारों ने राज्यभर में करीब 55 से 60 प्रतिशत छात्रसंघों में जीत हासिल की है। इनमें प्रतिष्ठित रामादेवी महिला विश्वविद्यालय और रेवेन्शॉ विश्वविद्यालय भी शामिल हैं।’’

एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष बिभूति भूषण महापात्र ने कहा कि संगठन ने ओडिशा के विभिन्न क्षेत्रों के 30 कॉलेजों में अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की है। इनमें चित्रकोंडा, कांटाबांजी और लुइसिंगा शामिल हैं। उन्होंने कहा कि संगठन 80 अन्य कॉलेजों में दूसरे स्थान पर रहा।

उन्होंने कहा, ‘‘इतने कम समय में भी एनएसयूआई ने बड़ी संख्या में कॉलेजों में चुनाव जीते हैं। मैं संगठन के सभी विजयी उम्मीदवारों को बधाई देता हूं और आने वाले वर्षों में अधिक कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों में जीत हासिल करने के लिए हरसंभव प्रयास करूंगा।’’

अधिकारियों के अनुसार, राज्य के 346 कॉलेजों और 13 विश्वविद्यालयों में चुनाव हुए। कुल 6,891 उम्मीदवार मैदान में थे जिनमें से 1,398 निर्वाचित हुए। इनमें 756 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, जबकि 642 ने चुनाव लड़कर जीत हासिल की।

मुख्यमंत्री माझी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ओडिशा के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव में ऐतिहासिक और शानदार जीत के लिए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) को हार्दिक बधाई।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह जीत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति युवा पीढ़ी (जेन जी) के अटूट विश्वास और भरोसे का प्रतीक है।’’

माझी ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि संगठन ज्ञान, चरित्र और एकता के आदर्शों को बनाए रखेगा, सभी छात्रों की आवाज का सम्मान करेगा और परिसरों में स्वस्थ शैक्षणिक माहौल को बढ़ावा देगा।

उन्होंने सभी विजयी प्रतिनिधियों को सफल कार्यकाल और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे राष्ट्र निर्माण और विकसित ओडिशा के संकल्प में योगदान देंगे।

माझी ने आरोप लगाया कि पिछली बीजद सरकार ने अपने राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए छात्र संघ चुनावों पर रोक लगा रखी थी, जिससे छात्र अपनी लोकतांत्रिक आवाज उठाने से वंचित रहे।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सरकार ने चुनाव सफलतापूर्वक कराकर और परिसरों में लोकतंत्र की भावना बहाल करके छात्र समुदाय से किया गया वादा पूरा किया है।’’

दूसरी ओर, बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने भाजपा पर चुनावों में अनुचित तरीके अपनाने का आरोप लगाया।

विपक्ष के नेता पटनायक ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैं बीजद और बीजू छात्र जनता दल (बीसीजेडी) के उन सभी नेताओं की सराहना करता हूं, जिन्होंने अन्याय और अनुचित तरीकों से छात्रसंघ चुनाव जीतने की भाजपा सरकार की साजिश का मजबूती से मुकाबला किया।’’

पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके पटनायक ने विजयी उम्मीदवारों को बधाई भी दी।

उन्होंने कहा, ‘‘यह जीत ओडिशा के जेन-जी, युवाओं और छात्र शक्ति के समर्पण तथा एकता को दर्शाती है। आइए, कॉलेजों में शैक्षणिक माहौल बनाए रखने और छात्रों का उज्ज्वल भविष्य गढ़ने के लिए हम सब मिलकर आगे बढ़ें।’’

उपमुख्यमंत्री प्रवती परिदा ने पटनायक की आलोचना करते हुए कहा, ‘‘बीजद युवाओं से डरता था, यही वजह है कि पिछली सरकार ने पिछले आठ वर्षों से छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए।’’

भाषा रवि कांत नेत्रपाल

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