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अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ सबसे बड़े गैर-परमाणु बम के इस्तेमाल पर विचार कर रही: रिपोर्ट

वाशिंगटन, 16 अक्टूबर (भाषा) अमेरिकी सेना ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और परमाणु स्थलों को निशाना बनाने के लिए अपने जखीरे में मौजूद सबसे बड़े गैर-परमाणु बम का इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है। हालांकि, इसके लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी जरूरी होगी।

संबंधित बम को ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ भी कहा जाता है।

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के खिलाफ जारी युद्ध में ‘जीबीयू-43/बी मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट बम’ (एमओएबी) का इस्तेमाल एक बड़ा और गंभीर मोड़ साबित होगा। संबंधित युद्ध अब आठवें महीने में प्रवेश कर चुका है।

ट्रंप ने बृहस्पतिवार को न्यूजमैक्स से कहा कि अमेरिका ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर एक और हमला कर सकता है, जिसमें ‘पिकएक्स माउंटेन’ के नाम से जानी जाने वाली एक बेहद सुरक्षित जगह भी शामिल है।

यह पूछे जाने पर कि क्या वह तीन नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ का इस्तेमाल करने पर विचार कर रहे हैं, ट्रंप ने कहा कि यह परमाणु हथियार नहीं है।

ट्रंप ने कहा, 'यह बिल्कुल भी परमाणु नहीं है, यह बस एक बहुत बड़ा बम है। यह एक छोटे परमाणु बम की तरह है। लेकिन ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ एक बहुत बड़ा बम है - पर यह परमाणु नहीं है। मैं परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करूंगा, हमें ऐसा करने की जरूरत भी नहीं है।’’

लगभग 21,600 पाउंड वजनी एमओएबी का इस्तेमाल पहली बार अप्रैल 2017 में, ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान, अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट समूह के एक सुरंग परिसर को नष्ट करने के लिए किया गया था।

‘जीबीयू-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर’ (गहराई में दबे लक्ष्यों को नष्ट करने वाला बंकर उड़ाने वाला बम) के विपरीत, एमओएबी को मुख्य रूप से सतह पर बहुत बड़ा विस्फोट करने के लिए डिजाइन किया गया है।

सीएनएन ने बताया कि अधिकारियों ने सवाल उठाया है कि क्या यह ज़मीन के बहुत नीचे दबे ईरानी परमाणु प्रतिष्ठानों को प्रभावी ढंग से नष्ट कर सकता है।

पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में, ट्रंप ने कहा था कि उन्हें एक ‘‘बड़ा फैसला’’ लेना है-कि क्या ईरान के साथ कोई समझौता किया जाए या फिर ‘‘इस्लामिक रिपब्लिक को पूरी तरह नष्ट’’ कर दिया जाए।

भाषा नेत्रपाल रंजन

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