नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन मामले में रिलायंस कैपिटल लिमिटेड के पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) अमित बापना की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
अदालत ने अपने सामने मौजूद साक्ष्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि बापना ने रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) के कामकाज से जुड़े फैसले लेने में अनधिकृत रूप से अधिकारों का इस्तेमाल किया और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल) के निदेशक मंडल द्वारा लगाई गई मंजूरियों की शर्तों को दरकिनार कर कॉरपोरेट ऋण दिए।
विशेष न्यायाधीश विशाल पाहुजा ने बृहस्पतिवार को पारित आदेश में कहा, ‘‘आवेदक/आरोपी (बापना) के खिलाफ जांच एजेंसी द्वारा जुटाए गए साक्ष्य व्यापक हैं और आरएचएफएल तथा आरसीएफएल के कामकाज पर उनके व्यापक नियंत्रण की ओर संकेत करते हैं।’’
अदालत ने कहा कि साक्ष्यों से यह भी पता चलता है कि बापना कंपनियों द्वारा किए जा रहे लेनदेन से पूरी तरह अवगत थे और उन्हें इसकी पूरी जानकारी थी। इन लेनदेन का उद्देश्य रिलायंस अनिल अंबानी समूह की कंपनियों को लाभ पहुंचाना था।
अदालत ने कहा, ‘‘ऐसी कंपनियों की वित्तीय स्थिति की सावधानीपूर्वक जांच किए बिना सामान्य कॉरपोरेट ऋण के नाम पर बड़ी रकम हस्तांतरित की गई। जुटाए गए साक्ष्यों से पता चलता है कि आवेदक/आरोपी ने ऐसी मुखौटा कंपनियों के गठन में अहम भूमिका निभाई जिनकी देनदारियां उनकी संपत्तियों से अधिक थीं। इन कंपनियों का इस्तेमाल सार्वजनिक धन को निकालकर दूसरी जगह भेजने के माध्यम के रूप में किया गया।’’
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष की शिकायत (आरोपपत्र) और दस्तावेज भी दर्शाते हैं कि बापना ने आरसीएफएल के कामकाज से जुड़े फैसले लेने में अनधिकृत रूप से अधिकारों का इस्तेमाल किया और आरएचएफएल के निदेशक मंडल द्वारा दी गई मंजूरियों को दरकिनार करते हुए कॉरपोरेट ऋण वितरित किए।
अदालत ने बापना के वकील की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने समान स्थिति वाले अन्य सह-आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया है। अदालत ने कहा कि रिलायंस कैपिटल लिमिटेड, आरएचएफएल और आरसीएफएल के कामकाज में बापना का पद अन्य सह-आरोपियों की तुलना में अधिक वरिष्ठ था।
अदालत ने कहा कि बापना पूरे कामकाज के केंद्र में थे और अन्य सह-आरोपियों को निर्देश देते थे। कुछ सह-आरोपी तो सीधे बापना को रिपोर्ट भी करते थे।
अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर बापना जमानत पाने के हकदार नहीं हो जाते कि वह पांच महीने से अधिक समय से हिरासत में हैं।
अदालत ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि एजेंसी के आरोपपत्र के अनुसार, दिल्ली उच्च न्यायालय से जमानत पा चुके सह-आरोपी अमिताभ झुनझुनवाला धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कथित अपराध के प्रमुख सूत्रधार थे, जबकि बापना केवल झुनझुनवाला के निर्देशों के अनुसार अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे थे।
अदालत ने कहा कि भले ही झुनझुनवाला को पूरे लेनदेन का मुख्य सूत्रधार माना जाए, लेकिन सीएफओ होने के नाते बापना भी इन लेनदेन से जुड़े पूरे कामकाज में सक्रिय रूप से समान रूप से शामिल पाए गए हैं।
अदालत ने कहा, “इसके अलावा, सह-आरोपी झुनझुनवाला को जमानत गुण-दोष के आधार पर नहीं, बल्कि पूरी तरह चिकित्सकीय आधार पर दी गई है। इसलिए आरोपी उसी आधार पर समानता का लाभ पाने का हकदार नहीं है।’’
इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने बापना की जमानत याचिका खारिज कर दी।
भाषा गोला नरेश
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