नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (भाषा) देश में अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन को बढ़ावा देने के लिए खेल मंत्रालय ने शुक्रवार को राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) को 50 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता देने का प्रावधान किया है।
मंत्रालय ने संशोधित राष्ट्रीय खेल महासंघ सहायता योजना (एएनएसएफ) के संचालन संबंधी दिशा-निर्देश जारी करते हुए यह घोषणा की।
राष्ट्रीय चैंपियनशिप के आयोजन के लिए निर्धारित वित्तीय सहायता में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उच्च प्राथमिकता वाले खेलों के लिए 90 लाख रुपये की राशि बरकरार रखी गई है। इसमें सीनियर, जूनियर और सब-जूनियर वर्ग की प्रत्येक चैंपियनशिप के लिए 30-30 लाख रुपये दिए जाएंगे।
प्राथमिकता और सामान्य श्रेणी के खेलों के लिए 75 लाख रुपये का प्रावधान पहले की तरह जारी रहेगा। इसके तहत सीनियर, जूनियर और सब-जूनियर वर्ग की प्रत्येक चैंपियनशिप के आयोजन के लिए 25-25 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी।
इससे पहले अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के लिए महासंघों को अधिकतम दो करोड़ रुपये तक की सहायता दी जाती थी।
इस योजना के तहत राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविरों के आयोजन, अकादमियों में प्रशिक्षण और खिलाड़ियों को सहायता प्रदान करने के लिए वित्तीय मदद दी जाती है। इसके अलावा, विदेशी कोच, हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर और फिजियोथेरेपिस्ट, खेल वैज्ञानिकों तथा चिकित्सकों जैसे सहायक विशेषज्ञों की नियुक्ति में भी सहायता दी जाती है।
योजना में खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के माध्यम से विदेश में अनुभव हासिल करने के अवसर उपलब्ध कराना, सीनियर, जूनियर और सब-जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप का आयोजन, जमीनी स्तर पर खेलों को बढ़ावा देना, युवा खिलाड़ियों का विकास तथा राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) के प्रशासनिक कार्यों और सुशासन को मजबूत करना भी शामिल है।
मंत्रालय के अनुसार संशोधित दिशा-निर्देश भारत के दीर्घकालिक खेल दृष्टिकोण और 2036 ओलंपिक की मेजबानी की दावेदारी के साथ 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों के अनुरूप तैयार किये गये हैं।
मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, ‘‘अब एनएसएफ को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी के लिए 50 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जा सकेगी। सहायता राशि प्रतियोगिता के स्वरूप और महत्त्व के साथ-साथ उसमें भाग लेने वाले देशों और खिलाड़ियों की संख्या के आधार पर तय की जाएगी। महासंघों की ओर से मिले प्रस्तावों का मूल्यांकन खेल सचिव की अध्यक्षता वाली एक नामित समिति करेगी।’’
अधिकतम 50 करोड़ रुपये की सहायता उन खेलों के लिए दी जाएगी जिनमें भारत ने ओलंपिक या विश्व चैंपियनशिप में पदक जीता हो या शीर्ष 10 में स्थान हासिल किया हो। इसके लिए व्यक्तिगत स्पर्धाओं में प्रतियोगिता में कम से कम 50 देशों और 500 खिलाड़ियों की भागीदारी तथा टीम स्पर्धाओं में 12 से अधिक देशों और 200 खिलाड़ियों की भागीदारी आवश्यक होगी।
अगली श्रेणी में 20 करोड़ रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। यह उन खेलों को मिलेगी, जिनमें भारत ने ओलंपिक या विश्व चैंपियनशिप में शीर्ष 16 में जगह बनाई हो। इस श्रेणी में व्यक्तिगत स्पर्धाओं में 50 से कम देशों और टीम स्पर्धाओं में 12 से कम देशों की भागीदारी वाली प्रतियोगिताएं शामिल होंगी।
इसके अलावा स्वदेशी खेलों की विश्व चैंपियनशिप के आयोजन के लिए भी अधिकतम 20 करोड़ रुपये की सहायता दी जा सकेगी बशर्ते इसमें 50 से अधिक देशों के खिलाड़ी भाग लें।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई से कहा, ‘‘वित्तीय सहायता का आवंटन प्रतियोगिताओं के स्तर के आधार पर किया जा रहा है ताकि भारत में उच्च गुणवत्ता वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं आयोजित हों। हम अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के नाम पर घटिया स्तर के आयोजनों की अनुमति नहीं देना चाहते।’’
भारत में आयोजित होने वाली एशियाई चैंपियनशिप के लिए अधिकतम तीन करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। सहायता राशि संबंधित खेल में एशियाई खेलों के दौरान भारत के प्रदर्शन और प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ियों की संख्या के आधार पर तय होगी।
खेल मंत्रालय ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय खेल महासंघों से प्राप्त प्रस्तावों का मूल्यांकन करने के लिए गठित समिति अपनी कार्यप्रणाली और प्रक्रिया स्वयं निर्धारित करेगी।’’
इस योजना में राष्ट्रीय खेलों के आयोजन के लिए भी 50 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। इस राशि का इस्तेमाल खेल उपकरणों की व्यवस्था, टाइमिंग, स्कोरिंग एवं परिणाम (टीएसआर) सेवाओं, तकनीकी अधिकारियों के पारिश्रमिक और प्रतियोगिताओं के तकनीकी संचालन पर किया जा सकेगा।
विदेश में प्रशिक्षण लेने वाले खिलाड़ियों को राहत देते हुए खेल मंत्रालय ने भोजन के खर्च से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। अब प्रशिक्षण अवधि पूरी होने के बाद भोजन के बिलों में से प्रतिदिन 60 डॉलर तक की राशि को बिल प्रस्तुत करने की अनिवार्यता से छूट दी जाएगी।
वर्तमान में ओलंपिक सहित बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की तैयारी कर रहे खिलाड़ियों को राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों (एनसीओई), खेल अकादमियों, निजी खेल सुविधाओं और विदेशों में प्रशिक्षण दिया जाता है।
खेल मंत्रालय ने कहा, ‘‘खिलाड़ियों को उच्चस्तरीय और विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए अत्याधुनिक खेल विज्ञान उपकरणों से लैस ओलंपिक प्रशिक्षण केंद्र (ओटीसी) स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है।’’
उन्होंने खेल मंत्री मनसुख मांडविया के पहले ही की गयी घोषणा का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘प्रत्येक केंद्र किसी एक खेल के लिए समर्पित होगा। इनमें आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं के साथ विशेषज्ञों की सेवाएं भी उपलब्ध होंगी। इससे भारतीय खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए विदेशों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।’’
भाषा आनन्द नमिता
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