कोझिकोड, 16 अक्टूबर (भाषा) उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शुक्रवार को कहा कि अगर केरलम में राजनीतिक हिंसा को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए, तो यह राज्य फिर से ‘ईश्वर की धरती’ बन जाएगा।
कोझिकोड में नवरात्र सरघोल्सवम (सांस्कृतिक महोत्सव)-2026 के उद्घाटन के अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य में राजनीतिक हिंसा में काफी कमी आई है और उन्होंने विश्वास जताया कि यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
इस कार्यक्रम में केरलम के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर भी मौजूद थे।
उन्होंने कहा, “राज्यपाल के साथ कार में यात्रा करते समय हमने अपने विचार साझा किए। मैंने उनसे कहा कि राजनीतिक हिंसा को छोड़कर केरलम हिंसा-मुक्त राज्य है। ईश्वर की कृपा से राजनीतिक हिंसा में भी काफी कमी आई है। मुझे विश्वास है कि यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी। हमें मिल-जुलकर रहना होगा।”
उन्होंने कहा कि केरलम में लोग आम तौर पर अपने धर्म की परवाह किए बिना रमजान, क्रिसमस और ओणम जैसे त्योहार मिलकर मनाते हैं।
उन्होंने कहा, “अगर केरलम में राजनीतिक हिंसा खत्म हो जाती है, तो राज्य फिर से ‘ईश्वर का अपना देश’ बन जाएगा।”
नवरात्र के संदेश पर जोर देते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि यह त्योहार अन्याय पर न्याय और भय पर साहस की जीत का उत्सव है।
उन्होंने कहा, “शक्ति चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अगर वह अन्याय के रास्ते पर चलती है, तो उसे हार का सामना करना पड़ेगा। नवरात्र मनाने का मूल संदेश यही है।”
उन्होंने कहा कि साहसी व्यक्ति वह नहीं होता, जो दूसरों पर हमला करता है, बल्कि वह होता है, जो अन्याय के खिलाफ खड़ा होता है।
उन्होंने कहा, “अन्याय पर न्याय की जीत होनी चाहिए और ज्ञान से अज्ञानता दूर होनी चाहिए। ये शाश्वत सिद्धांत हैं, जो मानवता को बेहतर भविष्य की ओर ले जा सकते हैं।”
देश की धार्मिक विविधता का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोग ईश्वर को अलग-अलग नामों से पुकार सकते हैं, लेकिन परमात्मा एक ही है।
उन्होंने कहा, “हम उसे अल्लाह, प्रभु यीशु, गुरुवायुरप्पन या अयप्पन कह सकते हैं। हम उसे किसी भी नाम से पुकार सकते हैं, लेकिन ईश्वर एक ही है।”
उन्होंने कहा कि देशभर में नवरात्र मनाने के अलग-अलग तरीके भारत की विविधता में एकता और साझा सभ्यतागत विरासत को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में नवरात्र को दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है, जबकि गुजरात में यह त्योहार गरबा और डांडिया के साथ मनाया जाता है। कर्नाटक में मैसूरु दशहरा भी भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, “परंपराएं भले ही अनेक हों, भाषाएं अलग-अलग हों और पूजा के तरीके जगह-जगह बदलते हों, लेकिन दशहरा मनाने की भावना और उसका सार हम सभी को एक सूत्र में बांधता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि हम एक ही धर्म का पालन करते हैं।”
भाषा तान्या संतोष
संतोष