नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (भाषा) विमान दुर्घटनाओं की जांच करने वाली एजेंसी विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने सिफारिश की है कि केदारनाथ घाटी में हेलीकॉप्टर उड़ाने वाले पायलट के पास पहाड़ी क्षेत्रों में उड़ान भरने का न्यूनतम अनुभव होना जरूरी है।
एजेंसी ने यह सिफारिश जून 2025 में हुए हेलीकॉप्टर हादसे की अंतिम रिपोर्ट जारी करते हुए की, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई थी।
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने केदारनाथ घाटी में हवाई यातायात का प्रबंधन करने वाले सीतापुर नियंत्रण केंद्र और उड़ान भरने वाले चालक दल के बीच बातचीत की रिकॉर्डिंग की व्यवस्था करने का भी सुझाव दिया है।
एजेंसी के अनुसार, इन रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल सुरक्षा संबंधी घटनाओं की जांच में किया जा सकता है।
आर्यन एविएशन का बेल 407 हेलीकॉप्टर (वीटी-बीकेए) 15 जून 2025 को उत्तराखंड में श्री केदारनाथ से गुप्तकाशी के बीच शटल उड़ान पर था, तभी दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।
एएआईबी ने दुर्घटना के संभावित कारणों में पायलट का सीमित उड़ान अनुभव तथा बादलों का अचानक बनना और तेजी से नीचे उतरना बताया है।
एजेंसी ने कहा कि बादलों को बनते और तेजी से करीब आते देखने के बावजूद चालक दल ने उसी मार्ग और ऊंचाई पर उड़ान जारी रखने का फैसला किया तथा समय रहते मार्ग बदलने या वापस लौटने का निर्णय नहीं लिया, जिसे दुर्घटना का एक संभावित कारण बताया गया है।
एएआईबी ने यह भी कहा कि उड़ान से पहले की परीक्षण उड़ान के बाद या दुर्घटना होने तक पूरी उड़ान के दौरान पायलट ने हेलीकॉप्टर में किसी असामान्य जानकारी की सूचना नहीं दी थी।
इस दुर्घटना में छह यात्रियों और एक पायलट की मौत हो गई थी।
भाषा संतोष नरेश
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