मुंबई, 16 अक्टूबर (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को कहा कि जब तक देश में संविधान है, तब तक सत्ता परिवर्तन का एकमात्र रास्ता चुनाव है और फैसले संसद में लिए जाएंगे।
फडणवीस का यह बयान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण की ‘सत्ता परिवर्तन’ संबंधी टिप्पणी को लेकर जारी विवाद के बीच आया है।
फडणवीस ने यह आरोप भी लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में संविधान और देश के लोकतंत्र पर हमले के प्रयास किए गए।
मुख्यमंत्री फडणवीस और भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बी. आर. गवई ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की एक शैक्षणिक पहल के तहत दो पुस्तकों का विमोचन किया। इस पहल का उद्देश्य महानगरपालिका के स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के बीच संवैधानिक मूल्यों, मौलिक कर्तव्यों और लोकतांत्रिक सिद्धांतों को बढ़ावा देना है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रशांत भूषण ने बृहस्पतिवार को ‘सत्ता परिवर्तन’ का आह्वान किया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि यह प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है।
मुंबई के दादर में आयोजित कार्यक्रम में फडणवीस ने कहा, “मैंने हाल में कुछ बयान सुने हैं। किसी ने अभी कहा कि अब लड़ाई संसद में नहीं, बल्कि सड़कों पर होगी और सत्ता बदल जाएगी। लेकिन मैं उनसे कहना चाहता हूं कि जब तक भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का संविधान अस्तित्व में है, तब तक फैसले संसद में लिए जाएंगे और सत्ता परिवर्तन केवल चुनाव के माध्यम से होगा।”
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में संविधान और देश के लोकतंत्र पर हमले के कई प्रयास किए गए, लेकिन भारत का संवैधानिक ढांचा इतना मजबूत है कि कोई भी उसे नुकसान नहीं पहुंचा सका।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के पड़ोसी देशों जैसी स्थिति पैदा करने की मंशा रखने वालों को याद रखना चाहिए कि संविधान सभी को न्याय पाने का अधिकार देता है।
उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि जो लोग पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल जैसी स्थिति पैदा करने की योजना बना रहे हैं, उन्हें याद रखना चाहिए कि इस संविधान ने देश में हर व्यक्ति को न्याय पाने का अधिकार दिया है।”
फडणवीस ने कहा कि लोगों को संवैधानिक तरीकों से न्याय मांगना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान के प्रावधानों के खिलाफ काम करने वालों से निपटने का भी इसमें प्रावधान है।
भाषा रंजन पवनेश
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