मुंबई, 16 अक्टूबर (भाषा) भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) बी आर गवई ने शुक्रवार को यहां कहा कि बाहरी और आंतरिक चुनौतियों के बावजूद डॉ. बी आर आंबेडकर द्वारा तैयार किए गए संविधान ने पिछले सात दशकों में देश को एकजुट रखा है।
पूर्व प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि संविधान स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के स्तंभों पर टिका है, लेकिन साथ ही आगाह किया कि 'जहां हर व्यक्ति को स्वतंत्रता का अधिकार है, वहीं इससे दूसरों की स्वतंत्रता का हनन नहीं होना चाहिए।'
गवई बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा संचालित स्कूलों के विद्यार्थियों में संवैधानिक मूल्यों, मौलिक कर्तव्यों और लोकतंत्र के प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से लिखी गई दो मराठी पुस्तकों 'स्मार्ट नागरिक' और 'विद्यार्थी प्रेरणा' के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे।
भारतीय लोकतंत्र के लचीलेपन (मजबूती) पर पूर्व सीजेआई ने कहा कि संविधान 1950 में तैयार किया गया था और उसके बाद के 76 वर्षों में देश में कई बदलाव और विकास हुए।
गवई ने कहा, 'बाहरी हमले हुए.... उग्रवाद, आतंकवाद जैसी आंतरिक चुनौतियां रहीं.... इस पृष्ठभूमि के बावजूद, एक बात ऐसी है जिस पर हमें गर्व होना चाहिए कि हमारा देश न केवल एकजुट रहा बल्कि विकास की ओर भी बढ़ा।'
उन्होंने कहा, 'हमने नेपाल, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों में स्थिति देखी है.... हमने देखा कि श्रीलंका में क्या हुआ। इस पृष्ठभूमि में हमारे देश के नागरिकों को एकजुट रखने का श्रेय हमारे संविधान को जाता है।'
पूर्व सीजेआई ने कहा कि इसका श्रेय आंबेडकर और उनके सहयोगियों (जिन्होंने संविधान का मसौदा तैयार किया था) को भी जाता है।
भाषा सुमित नरेश
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