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‘एंटीलिया’ बम धमकी मामला: सचिन वाझे को जमानत देने के खिलाफ एनआईए की अपील पर फैसला सुरक्षित

मुंबई, 16 अक्टूबर (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को सवाल किया कि वर्ष 2021 में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास ‘एंटीलिया’ से जुड़े बम धमकी मामले और कारोबारी मनसुख हिरन की हत्या के प्रकरण में आरोपी बर्खास्त पुलिसकर्मी सचिन वाझे को जमानत मिलने पर फिर से सेवा में शामिल किया जाएगा या नहीं।

न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नील गोखले की पीठ ने पिछले महीने एक विशेष अदालत द्वारा वाझे को जमानत दिए जाने के खिलाफ राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की अपील पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

वाझे को जमानत मिलने के तुरंत बाद एनआईए ने उच्च न्यायालय का रुख किया था और जमानत के आदेश पर तत्काल रोक लगाने का अनुरोध किया था।

उच्च न्यायालय ने अंतरिम रोक लगा दी थी, जिसके कारण वाझे अब भी ठाणे केंद्रीय जेल में बंद है। शुक्रवार को एनआईए की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह और वाझे के वकील वी. एम. थोराट की दलीलें सुनते हुए पीठ ने कहा कि 2020 में सेवा में बहाल किए जाने से पहले वाझे 17 साल तक निलंबित रहा था। हिरासत में मौत के एक मामले में आरोपी होने के कारण उसके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई थी।

उच्च न्यायालय ने सवाल किया, ‘‘अगर उसे जमानत मिल जाती है, तो क्या वह सेवा में शामिल होगा?’’ इसके जवाब में थोराट ने कहा कि ऐसा संभव नहीं है, क्योंकि इन दोनों मामलों में गिरफ्तारी के बाद वाझे को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।

उच्च न्यायालय ने एनआईए से यह भी पूछा कि यह मामला आतंकवादी कृत्य की श्रेणी में कैसे आता है।

अदालत ने पूछा, ‘‘यह आतंकवादी कृत्य क्यों है? सिर्फ इसलिए कि विस्फोटक मिले थे? आप इन विस्फोटकों को वाझे से कैसे जोड़ते हैं?’’

एनआईए की ओर से पेश सिंह ने कहा कि यह आतंकवादी कृत्य था, क्योंकि वाझे ने जिलेटिन की छड़ों से भरी कार सार्वजनिक स्थान पर खड़ी की थी।

दक्षिण मुंबई में 25 फरवरी, 2021 को ‘एंटीलिया’ के पास विस्फोटकों से भरी एक कार (एसयूवी) पायी गई थी।

यह कार कारोबारी मनसुख हिरन की थी जिसे कथित तौर पर चोरी कर लिया गया था। पांच मार्च 2021 को मनसुख का शव पड़ोसी ठाणे जिले में एक खाड़ी में पाया गया था।

एनआईए ने एंटीलिया बम धमकी और हिरन की हत्या से जुड़े संयुक्त मामले में 13 मार्च, 2021 को वाझे को गिरफ्तार किया था।

इसके बाद वाझे के खिलाफ भ्रष्टाचार का एक मामला दर्ज किया गया, जिसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रहे हैं।

भ्रष्टाचार के मामले में वाझे को पहले ही जमानत मिल चुकी है। सत्र अदालत ने वाझे को जमानत देते हुए कहा था कि एनआईए कड़े गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकवाद का प्रथम दृष्टया मामला साबित करने में विफल रही।

अदालत ने यह भी कहा था कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे साबित हो कि वाझे की कथित हरकत से अंबानी परिवार आतंकित हुआ था।

एनआईए ने अपनी अपील में उच्च न्यायालय से विशेष अदालत के आदेश को रद्द करने का अनुरोध किया। उसने इस आदेश को ‘अवैध’ और गलत बताते हुए अंतरिम राहत के तौर पर इस पर रोक लगाने की भी मांग की।

भाषा संतोष पवनेश

पवनेश