नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (भाषा) भारतीय कंपनियों को अपनी वैश्विक उपस्थिति बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को मजबूत करने और निर्यात को रफ्तार देने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) तथा निर्यात संवर्धन मिशन जैसे उपायों का लाभ उठाने पर ध्यान देना चाहिए। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के संजय बुधिया ने शुक्रवार को यह कहा।
उन्होंने बताया कि अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान भारत का कुल संचयी निर्यात 13.84 प्रतिशत बढ़कर 476.20 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
सीआईआई की राष्ट्रीय निर्यात समिति के चेयरमैन एवं पैटन इंटरनेशनल लिमिटेड के प्रबंध निदेशक बुधिया ने कहा कि भारतीय उद्योग की मजबूती तथा बढ़ती प्रतिस्पर्धी क्षमता से निर्यात को बढ़ाने में मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग सामान, रसायन और कपड़ा क्षेत्र का प्रदर्शन अच्छा है।
उन्होंने कहा, ''भारतीय कंपनियों, विशेष रूप से एमएसएमई के लिए यह आवश्यक है कि वे एफटीए तथा निर्यात संवर्धन मिशन जैसे कार्यक्रमों का पूरा लाभ उठाएं।''
भारत ने पिछले पांच वर्षों में आठ मुक्त व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिया है। देश पहले ही मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ओमान, ऑस्ट्रेलिया, ईएफटीए ब्लॉक (यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ - स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन) तथा ब्रिटेन के साथ समझौतों को लागू कर चुका है।
न्यूजीलैंड के साथ भी ऐसा ही एक समझौता 20 अक्टूबर से प्रभावी होगा। वहीं 27 देशों वाले यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ व्यापार समझौते पर दिसंबर में हस्ताक्षर किए जाएंगे।
भाषा पाण्डेय रमण
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