श्रीनगर, 16 अक्टूबर (भाषा) जम्मू-कश्मीर सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी कुमार राजीव रंजन द्वारा इस सप्ताह की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा (जेकेएएस) की एक महिला अधिकारी के साथ कथित दुर्व्यवहार की शुक्रवार को गहन जांच के आदेश दिए।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब घटना को लेकर राजनीतिक दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो सामने आने के बाद इसकी केंद्र शासित प्रदेश में व्यापक निंदा हुई और दोषी अधिकारी के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग उठी। राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने भी वीडियो का स्वत: संज्ञान लिया।
सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार, 2004 बैच की आईएएस अधिकारी और आवास एवं शहरी विकास विभाग की आयुक्त-सचिव मंदीप कौर को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।
उन्हें आदेश जारी होने की तारीख से 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। आदेश के अनुसार, सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त सचिव अमित वरमानी को इस मामले में ‘प्रस्तुतकर्ता अधिकारी’ नियुक्त किया गया है।
श्रम एवं रोजगार विभाग के प्रशासनिक सचिव रंजन इस सप्ताह की शुरुआत में एक समीक्षा बैठक के दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की भूमिका को लेकर गांदरबल की सहायक निदेशक (रोजगार) बीनिश वानी के साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के बाद विवादों में घिर गए।
ऑनलाइन प्रसारित वीडियो में 2010 बैच के आईएएस अधिकारी रंजन, वानी को बार-बार बीच में टोकते नजर आ रहे हैं। वानी अपने कार्यालय द्वारा हासिल किए गए लक्ष्यों के बारे में बता रही थीं और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की सहयोगी एजेंसी के रूप में भूमिका स्पष्ट कर रही थीं।
बातचीत के दौरान रंजन ने कनिष्ठ अधिकारी पर चिल्लाते हुए ‘चुप रहने’ के लिए कहा और उनके लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। वानी ने जब उनकी भाषा पर आपत्ति जताई, तो रंजन ने पलटकर कहा कि वह उनके बॉस हैं, इसलिए इस तरह बात कर सकते हैं।
वानी के अपने रुख पर अड़े रहने के बाद रंजन ने वहां मौजूद एक अन्य अधिकारी को उनके निलंबन का आदेश तैयार करने का निर्देश दिया और कथित तौर पर उन्हें सेवा से बर्खास्त करने की सिफारिश करते हुए सामान्य प्रशासन विभाग को पत्र लिखने की चेतावनी दी।
वर्ष 2015 बैच की जेकेएएस अधिकारी वानी चिकित्सा उपचार करा रही थीं और स्वीकृत छुट्टी पर होने के बावजूद ऑनलाइन बैठक में शामिल हुई थीं।
जम्मू-कश्मीर में इस घटना की विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने व्यापक निंदा की। नेताओं ने प्रशासनिक तनाव और केंद्र शासित प्रदेश की व्यवस्था में आईएएस अधिकारियों पर सीमित अधिकार क्षेत्र के मुद्दे को भी उठाया।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि प्रथम दृष्टया वरिष्ठ नौकरशाह का आचरण आईएएस अधिकारी के पद के अनुरूप नहीं था। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में आईएएस अधिकारियों पर नियंत्रण उपराज्यपाल के पास है, लेकिन उन्होंने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वानी के खिलाफ बदले की भावना से कोई कार्रवाई न की जाए।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही ऑनलाइन बैठक का वीडियो देखा है। प्रथम दृष्टया, वरिष्ठ नौकरशाह का आचरण एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से अपेक्षित व्यवहार के मानकों के अनुरूप नहीं था। कनिष्ठ जेकेएएस अधिकारी को दी गई धमकियों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इस मामले को मुख्य सचिव के समक्ष बेहद कड़े शब्दों में उठाया है। दुर्भाग्य से, केंद्र शासित प्रदेश में आईएएस अधिकारियों पर नियंत्रण उपराज्यपाल सचिवालय (लोक भवन) का है, लेकिन मुख्यमंत्री के रूप में मैंने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि जेकेएएस अधिकारी के खिलाफ प्रतिशोध की भावना से कोई कार्रवाई न हो।’’
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यदि जम्मू-कश्मीर पूर्ण राज्य होता, तो युवा जेकेएएस अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार करते दिख रहे आईएएस अधिकारी को उनके आचरण की जांच पूरी होने तक सामान्य प्रशासन विभाग से संबद्ध कर दिया गया होता।
अब्दुल्ला ने कहा, ‘केंद्र शासित प्रदेश होने के नाते हम उम्मीद करते हैं कि आईएएस अधिकारियों पर नियंत्रण रखने वाले प्राधिकारी सही उदाहरण पेश करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि गाली-गलौज तथा धमकी भरे व्यवहार को नजरअंदाज न किया जाए।’’
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने रंजन को जम्मू-कश्मीर से निष्कासित करने की मांग की। उन्होंने रंजन के बर्ताव को बेहद अनुचित बताते हुए कहा कि अधिकारियों का काम लोगों की सेवा करना है, न कि उनका अपमान करना या उनके साथ दुर्व्यवहार करना।
फारूक ने कहा, ‘‘उन्होंने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, वह पूरी तरह गलत थी। उन्हें फटकार लगाई जानी चाहिए। इससे पता चलता है कि उनमें वह शालीनता और मर्यादा नहीं है, जो एक अधिकारी में होनी चाहिए। अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे लोगों की बात सुनें। लोग केवल अपनी शिकायतें बताना चाहते हैं।’’
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि रंजन का महिला अधिकारी के साथ ‘अपमानजनक’ व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और मुख्यमंत्री से इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाने का आग्रह किया।
महबूबा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘इस तरह का अपमानजनक व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को तत्काल यह मामला भारत सरकार के समक्ष उठाना चाहिए और उस अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करनी चाहिए, जिस पर पहले से ही अवैध बंदूक लाइसेंस जारी करने के आरोप हैं।’’
कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष तारिक कर्रा ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मामले में तथ्यों का पता लगाने के लिए निष्पक्ष और समयबद्ध जांच का आदेश देने का आग्रह किया।
कर्रा ने एक पत्र में उपराज्यपाल से यह भी आग्रह किया कि जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा की महिला अधिकारी बीनिश वानी को किसी भी तरह से ‘प्रताड़ित’ न किया जाए और न ही उनके खिलाफ बदले की भावना से कोई कार्रवाई की जाए।
लोकसभा सदस्य आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने भी इस घटना को गरिमा पर हमला करार दिया और चेतावनी दी कि यदि महिला अधिकारी के खिलाफ बदले की भावना से कोई कार्रवाई की गई, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
वीडियो का स्वत: संज्ञान लेते हुए एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू को पत्र लिखकर वीडियो की सत्यता की पुष्टि कराने, निष्पक्ष जांच करने और आरोपों की पुष्टि होने पर उचित कानूनी एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का आग्रह किया।
आयोग ने अधिकारी की सुरक्षा और सहायता सुनिश्चित करने के साथ ही कार्यस्थल पर उत्पीड़न, प्रताड़ना और पेशेवर स्तर पर बदले की कार्रवाई रोकने के लिए कड़े सुरक्षा उपायों की भी मांग की है।
जेकेएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन ने धमकाने और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने की घटना की कड़ी निंदा करते हुए वीडियो को फर्जी या कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार बताने के विभागीय प्रयासों को भी खारिज कर दिया।
एसोसिएशन ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि मौके पर मौजूद अधिकारियों की गवाही से वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि होती है। उसने कहा कि प्रशासनिक अनुशासन आपसी सम्मान, निष्पक्षता और जवाबदेही पर आधारित होना चाहिए। एसोसिएशन ने रंजन से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के साथ-साथ उनके खिलाफ औपचारिक रूप से कदाचार की कार्यवाही शुरू करने की मांग की।
रंजन पहले भी कानूनी विवादों में घिर चुके हैं। 2020 में कुपवाड़ा के उपायुक्त के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हजारों हथियार लाइसेंस जारी करने से जुड़े मामले में कथित संलिप्तता को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने उन्हें गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने उन्हें निलंबित कर दिया था, हालांकि 2021 में उन्हें बहाल कर दिया गया। आय से अधिक संपत्ति के आरोपों में भी वह जांच के घेरे में हैं।
भाषा आशीष नरेश
नरेश