गंगटोक, 16 अक्टूबर (भाषा) सिक्किम में विपक्षी दलों ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता दुष्यंत गौतम को इस पूर्वोत्तर राज्य का नया राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर शुक्रवार को आपत्ति जताई।
यह आपत्ति उन आरोपों के बाद सामने आयी है कि गौतम ही वह 'वीआईपी' (अति विशिष्ट व्यक्ति) हैं, जिन्होंने 2022 में उत्तराखंड के एक होटल की रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या से पहले उससे कथित तौर पर अनुचित लाभ की मांग की थी।
सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) ने उनकी नियुक्ति को सिक्किम की महिलाओं का 'अपमान' करार दिया, जबकि कांग्रेस ने गंगटोक में विरोध प्रदर्शन कर मांग की कि जब तक केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच पूरी नहीं कर लेती, तब तक उन्हें (गौतम) वापस बुलाया जाए।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर को भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव गौतम को राज्यपाल नियुक्त किया था। उनकी नियुक्ति के बाद सिक्किम, उत्तराखंड और दिल्ली सहित कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन और आलोचनाएं शुरू हो गई हैं।
एसडीएफ की महिला इकाई की प्रभारी कोमल चामलिंग ने एक वीडियो जारी कर कहा कि उनकी पार्टी भंडारी के माता-पिता के साथ खड़ी है और मांग करती है कि सीबीआई की जांच पूरी होने तक गौतम की नियुक्ति वापस ली जाए।
चामलिंग ने कहा, 'हम अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट करना चाहते हैं कि हम अंकिता भंडारी के माता-पिता के साथ खड़े हैं।'
केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए चामलिंग ने पूछा कि क्या केंद्र का मानना है कि सिक्किम के लोग 'सीधे-सादे' हैं और बिना आवाज उठाए उन पर थोपे गए फैसलों को स्वीकार कर लेंगे।
चामलिंग ने कहा कि 12 अक्टूबर को सिक्किम के राज्यपाल नियुक्त किए गए गौतम को सीबीआई जांच पूरी होने तक किसी भी राज्य में राज्यपाल की जिम्मेदारी नहीं दी जानी चाहिए।
सिक्किम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एसपीसीसी) ने शुक्रवार को गंगटोक में जिला अदालत परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और सीबीआई जांच का परिणाम आने तक गौतम की नियुक्ति रद्द करने की मांग की।
एसपीसीसी अध्यक्ष गोपाल छेत्री ने कहा कि उत्तराखंड में भाजपा की कथित अवैध गतिविधियों पर सिक्किम के लोगों को चुप नहीं रहना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि भंडारी के माता-पिता द्वारा उठाई गई चिंताओं का समाधान किया जाए।
भाषा सुमित गोला
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