गुवाहाटी, 16 अक्टूबर (भाषा) गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को गायक जुबिन गर्ग की मौत के मामले में आरोपी और असम पुलिस के निलंबित उपाधीक्षक संदीपन गर्ग को जमानत दे दी।
उनकी ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनन कुमार भुइयां ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि न्यायमूर्ति राजेश मजूमदार की एकल पीठ ने संदीपन गर्ग की याचिका पर सुनवाई के बाद जमानत मंजूर की।
भुइयां ने कहा, ‘‘अदालत ने अभी पूरा आदेश नहीं पढ़ा है। हम विस्तृत फैसले का इंतजार कर रहे हैं, ताकि पता चल सके कि किन आधारों पर जमानत दी गई है।’’
उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय संदीपन गर्ग के खिलाफ दाखिल आरोपपत्र को रद्द करने के अनुरोध वाली एक अन्य याचिका पर भी अलग से सुनवाई कर रहा है। संदीपन गर्ग दिवंगत गायक के रिश्तेदार हैं।
निलंबित पुलिस अधिकारी पर गैर इरादतन हत्या का आरोप लगाया गया है।
भुइयां ने कहा कि संदीपन गर्ग को दुर्गा पूजा की छुट्टियों के बाद रिहा किए जाने की संभावना है, क्योंकि अदालत शनिवार से बंद रहेगी और रिहाई से जुड़ी कुछ औपचारिकताएं अभी पूरी की जानी बाकी हैं।
उच्च न्यायालय ने नौ अक्टूबर को इस मामले की एक अन्य आरोपी अमृत प्रभा महंत को 50,000 रुपये के मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानतदारियों पर जमानत दी थी। इसके बाद उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया।
इससे पहले, 23 सितंबर को एक विशेष अदालत ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में गायक के दो निजी सुरक्षा अधिकारियों (पीएसओ) नंदेश्वर बोरा और परेश बैश्य को जमानत दे दी थी। हालांकि, गायक की मौत के मामले में वे अब भी जेल में हैं।
प्रसिद्ध गायक की 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी। वह नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल (एनईआईएफ) के चौथे संस्करण में शामिल होने के लिए सिंगापुर गए थे।
इस मामले में एनईआईएफ के मुख्य आयोजक श्यामकानु महंत, गायक के प्रबंधक सिद्धार्थ शर्मा, बैंड के सदस्य शेखर ज्योति गोस्वामी, अमृत प्रभा महंत, संदीपन गर्ग और गायक के दोनों निजी सुरक्षा अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था।
मुख्य आरोपी श्यामकानु महंत के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की आठ धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं, जबकि शर्मा के खिलाफ सात आरोप हैं। गोस्वामी और अमृत प्रभा महंत पर छह-छह आरोप लगाए गए हैं, जबकि दोनों निजी सुरक्षा अधिकारियों के खिलाफ दो-दो आरोप हैं। संदीपन गर्ग के खिलाफ एक आरोप है।
आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत हत्या, गैर इरादतन हत्या, आपराधिक साजिश और लापरवाही से मौत से संबंधित आरोप लगाए गए हैं।
राज्यभर में 60 से अधिक प्राथमिकी दर्ज होने के बाद असम पुलिस के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) के विशेष जांच दल (एसआईटी) ने गायक की मौत की जांच की।
अलग से जांच करने वाली सिंगापुर पुलिस ने निष्कर्ष निकाला कि किसी साजिश से हुई मौत का कोई सबूत नहीं मिला।
सिंगापुर की कोरोनर अदालत ने भी किसी साजिश की आशंका को खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि गायक-संगीतकार अत्यधिक नशे में थे और जीवनरक्षक जैकेट पहनने से इनकार करने के बाद लाजरस द्वीप के पास समुद्र में डूब गए थे।
हालांकि, असम के अधिकारियों ने कहा कि सिंगापुर में हुई जांच के निष्कर्षों का राज्य में चल रहे मामले पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
भाषा गोला नरेश
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