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न्यायालय ने पीएफआई संस्थापक अबूबकर को दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दी

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने आतंकवाद निरोधक कानून यूएपीए के तहत एक मामले में गिरफ्तार ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ (पीएफआई) के संस्थापक अध्यक्ष ई. अबूबकर को शुक्रवार को कुछ शर्तों के साथ दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दे दी।

अबूबकर को एक मामले में गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया गया था।

न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की खंडपीठ ने अबूबकर को यहां साकेत स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में अपने इलाज का खर्च उठाने का निर्देश दिया और कहा कि उसके साथ परिवार का एक सदस्य रहेगा।

खंडपीठ ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता को उसके साथ जाने वाले व्यक्ति (पुलिसकर्मी) के लिए जरूरी शुल्क का भुगतान करना होगा। हम यह स्पष्ट करते हैं कि तीमारदार के पास कोई आपत्तिजनक वस्तु नहीं होनी चाहिए। हम अस्पताल से अनुरोध करते हैं कि वह आगे के इलाज और अस्पताल में संभावित रूप से रुकने की अवधि के बारे में एक रिपोर्ट दाखिल करे। अस्पताल का खर्च याचिकाकर्ता द्वारा उठाया जाएगा।’’

न्यायमूर्ति सुंदरेश ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि अदालत चीजों के प्रति असंवेदनशील नहीं हो सकती और एक न्यायाधीश के तौर पर ‘‘आपको इसमें थोड़ी सहानुभूति भी दिखानी चाहिए।’’

सुनवाई के दौरान, राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने सुझाव दिया कि अबूबकर को इलाज के लिए एक हफ्ते के लिए मैक्स अस्पताल भेजा जा सकता है।

राजू ने कहा, ‘‘दूसरी बात, अस्पताल में कोई औजार नहीं होगा। तीसरी बात, अस्पताल में कोई बाहरी व्यक्ति उससे नहीं मिल सकता। पुलिस उसके खर्च पर कमरे के बाहर तैनात रहेगी।’’

इससे पहले, दिल्ली की एक अदालत ने अबूबकर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अबूबकर को भारत सरकार को उखाड़ फेंकने और 2047 तक इस्लामिक खिलाफत स्थापित करने की कथित साजिश में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

एनआईए के मुताबिक पीएफआई, उसके पदाधिकारियों और सदस्यों ने देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए पैसा जुटाने की एक आपराधिक साजिश रची थी। वे इस मकसद के लिए अपने कैडर को प्रशिक्षित करने और उन्हें कट्टरपंथ का पाठ पढ़ाने के लिए शिविर भी लगा रहे थे।

अबूबकर ने बताया कि उसकी उम्र 70 साल से अधिक है और उसे पार्किंसंस की बीमारी है एवं कैंसर संबंधी सर्जरी भी हो चुकी है। उसने तर्क दिया कि मामले के गुण-दोष के आधार पर भी उसे जमानत मिलनी चाहिए, क्योंकि एनआईए उसके खिलाफ कोई ठोस मामला बनाने में पूरी तरह से विफल रही है।

सितंबर 2022 में पीएफआई पर देशव्यापी प्रतिबंध लगने से पहले, कई राज्यों में छापेमारी के दौरान संगठन से जुड़े होने के संदेह में बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया या गिरफ्तार किया गया।

अभिकरण के नेतृत्व में कई एजेंसियों के संयुक्त अभियान के तहत, देश भर में लगभग एक साथ की गई छापेमारी में 11 राज्यों से बड़ी संख्या में पीएफआई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया या गिरफ्तार किया गया। इन पर देश में आतंकवादी गतिविधियों का समर्थन करने का संदेह था।

अबूबकर को 22 सितंबर, 2022 को गिरफ्तार किया गया था।

भाषा

राजकुमार नरेश संतोष

संतोष