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कुमारस्वामी ने पुलिस को धमकाने के आरोपों को नकारा, 'स्टिंग ऑपरेशन' की जांच की मांग की

बेंगलुरु, 16 अक्टूबर (भाषा) केंद्रीय मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने शुक्रवार को कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे पर पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को निशाना बनाने वाले कथित 'स्टिंग ऑपरेशन' के वीडियो की जांच में अपने अधिकारों का 'दुरुपयोग' करने का आरोप लगाया। उन्होंने बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त कार्यालय के दौरे के दौरान पुलिस अधिकारियों को धमकाने के आरोपों से भी इनकार किया।

कुमारस्वामी ने कहा कि वह इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करने के लिए बृहस्पतिवार को पुलिस आयुक्त से मिलने गए थे और जांच का सामना करने के लिए स्वयं भी तैयार हैं। खरगे ने कहा था कि जांच के दौरान जिसका भी नाम सामने आएगा, पुलिस उससे पूछताछ करेगी और संदेह होने पर केंद्रीय मंत्री से भी सवाल किए जा सकते हैं।

जनता दल (सेक्युलर) के दूसरे सबसे प्रमुख नेता कुमारस्वामी ने अपने समर्थकों के साथ बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह के कार्यालय के बाहर धरना दिया और सिद्धरमैया के खिलाफ कथित 'स्टिंग ऑपरेशन' की कोशिश की निष्पक्ष जांच की मांग की।

सिद्धरमैया ने बुधवार को अदालत से आदेश हासिल किया, जिसके तहत उनके खिलाफ मानहानिकारक सोशल मीडिया पोस्ट को प्रकाशित या प्रसारित करने पर रोक लगा दी गई।

कुमारस्वामी ने सिद्धरमैया के खिलाफ कथित 'स्टिंग ऑपरेशन' को सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर जारी आपसी खींचतान का नतीजा बताया।

केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करने के आरोप में जनता दल (सेक्युलर) के दो कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि वीडियो बनाने वालों को संरक्षण दिया जा रहा है जबकि निर्दोष पार्टी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है।

कुमारस्वामी ने यहां संवाददाताओं से कहा, 'मैं वहां किसी को धमकाने नहीं गया था। मैं यह कहने गया था कि जांच की शुरुआत मुझसे की जानी चाहिए।'

खरगे ने बृहस्पतिवार को कहा था कि पुलिस निर्धारित प्रक्रिया का पालन कर रही है और जांच के दौरान नाम सामने आने वाले लोगों से पूछताछ कर रही है। उन्होंने कहा था कि अब तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

खरगे ने कुमारस्वामी से सार्वजनिक रूप से आरोप लगाने के बजाय अपने पास मौजूद सबूत पुलिस या अदालत के समक्ष पेश करने को कहा था।

उन्होंने कहा था, 'पहले उन्होंने जांच की मांग की। अब जब हम जांच कर रहे हैं और जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनसे पूछताछ कर रहे हैं, तो उन्हें इस पर आपत्ति है। पुलिस को अपना काम करने दीजिए।'

खरगे ने कहा कि अगर सबूतों से कुमारस्वामी द्वारा गलत किया जाना साबित होता है, तो वह उन्हें गिरफ्तार करवा देंगे।

हालांकि, कुमारस्वामी ने गृह मंत्री के आचरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी के भी खिलाफ जांच कराने संबंधी उनकी टिप्पणी से वह नाराज हुए थे।

कथित 'स्टिंग ऑपरेशन' का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने इसमें शामिल व्यक्ति को दिए जा रहे 'संरक्षण' पर सवाल उठाया और मांग की कि जांच असली दोषियों पर केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर युवाओं से पुलिस की पूछताछ पर भी आपत्ति जताई और पूछा कि उन पर संदेह करने का क्या आधार है।

कुमारस्वामी ने पुलिस के किसी अधिकारी को धमकी देने से इनकार करते हुए कहा कि पुलिस आयुक्त कार्यालय में उनके दौरे का वीडियो फुटेज उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि पुलिस आयुक्त ने निष्पक्ष जांच करने के लिए समय मांगा था।

उन्होंने कहा, 'मैंने केवल यह मांग की है कि वास्तविक दोषियों और अपराधियों के खिलाफ सख्त जांच हो। आप इसे धमकी बता रहे हैं।'

कुमारस्वामी ने पुलिस की कार्रवाई में भेदभाव का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि क्या पुलिस बल का इस्तेमाल सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को डराने के लिए किया जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार पर भर्ती में कथित अनियमितताओं को ठीक से नहीं संभालने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के माध्यम से 24 इंजीनियर के चयन का उल्लेख किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि एक जांच में 10 उम्मीदवारों के चयन में अनियमितताएं पाई गई थीं और उनकी नियुक्तियां रद्द करने की सिफारिश की गई थी, लेकिन सरकार ने फिर भी उन्हें नियुक्त कर दिया।

भाषा

शुभम नरेश

नरेश