नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पूर्व मॉडल त्विषा शर्मा की अप्राकृतिक मौत के मामले में भोपाल की सत्र अदालत में जारी सुनवाई पर शुक्रवार को रोक लगा दी, और मामले को दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित करने के अनुरोध वाली याचिका पर सीबीआई, पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को नोटिस जारी किया।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने त्विषा के पिता नवनिधि शर्मा द्वारा दायर याचिका पर आदेश पारित किया।
त्विषा के पिता ने आशंका जताई थी कि मध्यप्रदेश में उनकी बेटी के मामले की निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो पाएगी। उन्होंने अपनी बेटी की सास के प्रभाव का हवाला दिया, जो सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश हैं।
त्विषा (33) का शव भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में स्थित अपने ससुराल में 12 मई को फंदे से लटका मिला था। उनके परिवार ने ससुराल वालों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। वहीं, ससुराल वालों ने दावा किया कि त्विषा को मादक पदार्थों की लत थी।
पुलिस ने त्विषा के पति और सास के खिलाफ दहेज के लिए परेशान करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की थी।
वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा, सिद्धार्थ अग्रवाल और अधिवक्ता अभिजीत सिन्हा याचिकाकर्ता नवनिधि शर्मा की ओर से पेश हुए।
याचिकाकर्ता ने इस आधार पर मुकदमे को दिल्ली स्थानांतरित करने का अनुरोध किया कि वह दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में रहते हैं।
यह मामला भोपाल में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के समक्ष लंबित है।
दस अक्टूबर तक, कार्यवाही आरोप तय करने पर बहस के चरण तक पहुंच गई थी।
मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा की जा रही जांच की निष्पक्षता को लेकर जताई गई चिंताओं के बीच, शीर्ष अदालत ने इस साल मई में त्विषा की मौत का स्वतः संज्ञान लिया था।
बाद में, जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई।
शुरुआती प्राथमिकी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 80(2), 85 और 3 (5) के तहत दर्ज की गई थी, जो क्रमशः दहेज मृत्यु, पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता, और समान इरादे से संबंधित हैं।
दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 भी लगाई गई थीं, जो दहेज देने या लेने और दहेज की मांग करने से संबंधित हैं।
जांच के बाद, सीबीआई ने गिरिबाला के खिलाफ दहेज-मृत्यु का आरोप हटा दिया और बीएनएस की धारा 108 लगाई, जो आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, गिरिबाला ने कथित तौर पर त्विषा को ताने देकर और परेशान करके आत्महत्या के लिए उकसाया।
भोपाल की निचली अदालत ने 15 मई को गिरिबाला को अग्रिम जमानत दे दी थी।
मध्यप्रदेश सरकार और त्विषा के माता-पिता ने उच्च न्यायालय में इस आदेश को चुनौती दी थी, जिसने 27 मई को उसकी अग्रिम जमानत रद्द कर दी।
भाषा नेत्रपाल शफीक
शफीक