पिथौरागढ़, 16 अक्टूबर (भाषा) उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों की महिला किसानों ने शुक्रवार को बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की।
उन्होंने कहा कि मौसम की अनिश्चितता और जंगली जानवरों द्वारा फसलों को पहुंचाए जा रहे नुकसान के कारण खेती जारी रखना मुश्किल होता जा रहा है। पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट की उपजिलाधिकारी खुशबू पांडे के माध्यम से राज्य सरकार को सौंपे गए ज्ञापन में महिला किसान संगठनों ने मौसम के बदलते स्वरूप और कृषि एवं वनों पर निर्भर समुदायों पर इसके प्रभाव का व्यापक अध्ययन कराने की भी मांग की।
इसके अलावा, उन्होंने स्थानीय घास की प्रजातियों, झाड़ियों और जड़ी-बूटियों के संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की।
ज्ञापन सौंपने से पहले ‘एक्शनएड’, ‘पहल सोसाइटी’ और ‘महिला किसान अधिकार मंच’ से जुड़ी महिला किसानों ने एक बैठक की।
उन्होंने बैठक में बेमौसम और अत्यधिक बारिश, मौसम में बदलाव और स्थानीय जंगली घास की प्रजातियों में आए परिवर्तनों के प्रभावों पर चर्चा की।
डीडीहाट में ‘महिला किसान अधिकार मंच’ की आयोजक खीमा जेठी ने कहा, ”पहले से ही जंगली जानवरों के खतरे से जूझ रही पारंपरिक फसलों को इस साल बेमौसम ओलावृष्टि से और अधिक नुकसान झेलना पड़ा है। विभिन्न कारणों से फसलों को हुए भारी नुकसान के चलते खेती को एक पेशे के रूप में बनाए रखना मुश्किल हो गया है। हम राज्य सरकार से इन नुकसानों के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं, ताकि किसान अपना काम जारी रख सकें।”
जेठी ने बताया कि तीनों संगठनों ने स्थानीय घास, झाड़ियों और जड़ी-बूटियों की प्रजातियों को बचाने और संरक्षित करने के उपाय करने की भी मांग की।
उन्होंने कहा कि स्थानीय वनस्पतियों की इन प्रजातियों का संरक्षण न केवल पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा बल्कि स्थानीय वनों को बचाने में भी मददगार होगा।
भाषा सं दीप्ति जितेंद्र
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