नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा से कहा कि वह नादिया जिले के अपने दौरे से एक दिन पहले जिला प्रशासन को सूचित करें ताकि अधिकारी प्रोटोकॉल के अनुसार आवास सहित आवश्यक व्यवस्थाएं कर सकें।
शीर्ष अदालत ने मोइत्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में जिला प्रशासन के एक सितंबर के उस परिपत्र का मुद्दा उठाया गया था, जिसमें सांसदों और विधायकों को प्रस्तावित दौरे से कम से कम तीन से चार दिन पहले सूचना देने को कहा गया था, ताकि प्रशासन उचित व्यवस्थाएं कर सके।
सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, ‘‘ये ऐसे मुद्दे नहीं हैं, जिन्हें अदालत में लाया जाना चाहिए। इसके लिए एक छोटी सी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की जरूरत है।’’
पश्चिम बंगाल की कृष्णानगर लोकसभा सीट से सांसद मोइत्रा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि नादिया जिला प्रशासन के अधिकारियों ने अगस्त में उन्हें सर्किट हाउस से बाहर जाने को कहा था, जबकि राज्य सरकार के स्वामित्व वाले इस परिसर में उन्हें एक कमरा आवंटित किया गया था।
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि किसी अधिकारी ने मोइत्रा से परिसर खाली करने को नहीं कहा था और उन्हें सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान की गई थीं।
सांसद की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि एक सितंबर का परिपत्र विशेष रूप से मोइत्रा को निशाना बनाकर जारी किया गया था।
उन्होंने कहा कि प्रोटोकॉल के अनुसार, एक सांसद का दर्जा मुख्य सचिव से ऊपर होता है।
पीठ ने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि इस मामले को सुलझा लिया जाए। किसी को भी असुविधा नहीं होनी चाहिए।’’
मेहता ने कहा कि एक सितंबर के परिपत्र को लागू नहीं किया जाएगा।
पीठ ने शंकरनारायणन से कहा कि मोइत्रा का कार्यालय उनके दौरे से एक दिन पहले जिला प्रशासन को सूचित करे।
मोइत्रा ने दावा किया था कि 14 अगस्त की रात उनके परिसर छोड़ने से इनकार करने के बाद सर्किट हाउस के बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और भीड़ ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए।
उन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भी लिखा था।
भाषा
शफीक नरेश
नरेश