बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश), 16 अक्टूबर (भाषा) हिमाचल प्रदेश में मादक पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ अभियान के तहत बिलासपुर जिला प्रशासन ने पुलिस को मोबाइल मादक पदार्थ जांच मशीन उपलब्ध कराई है। राज्य में अपनी तरह की पहली बताई जा रही इस मशीन से सबसे पहले उपायुक्त की जांच की जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि ‘सो-टॉक्सा’ नाम की इस मशीन की कीमत करीब 19 लाख रुपये है। यह एम्फेटामाइन, मेथामफेटामीन, बेंजोडायजेपाइन, गांजा (टीएचसी), कोकीन और अफीम से बने मादक पदार्थों सहित छह प्रमुख श्रेणियों के मादक पदार्थों की पहचान करने में सक्षम है।
उन्होंने कहा कि मादक पदार्थ ‘चिट्टा' से जुड़े मामलों में इस्तेमाल किए गए पदार्थों की प्रकृति का पता लगाने के लिहाज से यह मशीन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
उपायुक्त राहुल कुमार ने शुक्रवार को कहा, ‘‘हम राज्य की पहली ‘सो-टॉक्सा’ मोबाइल मादक पदार्थ जांच मशीन से जांच शुरू करने जा रहे हैं। सबसे पहले मेरे कार्यालय में मेरी जांच की जाएगी।’’
उन्होंने कहा कि इसके बाद प्रशासन के अन्य अधिकारियों की भी जांच की जाएगी। इस संबंध में पुलिस प्रशासन को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
कुमार के बाद उपमंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम), अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) और उनके कार्यालय के अन्य अधिकारियों तथा कर्मचारियों की जांच की जाएगी।
जिला प्रशासन ने जिला खनिज न्यास के माध्यम से यह मोबाइल जांच प्रणाली पुलिस को उपलब्ध कराई है।
अधिकारियों ने बताया कि इस मशीन को मादक पदार्थों के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में मौके पर ही जांच करने के लिए तैयार किया गया है। इस पहल के जरिए जिला प्रशासन मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में जागरूकता और जवाबदेही का मजबूत संदेश देना चाहता है।
उन्होंने कहा कि इस मोबाइल प्रणाली का एक प्रमुख लाभ यह है कि इससे निर्धारित नमूना लेने और जांच की प्रक्रियाओं के तहत मौके पर ही प्रारंभिक जांच की जा सकती है। इससे जांच एजेंसियों को संदिग्ध पदार्थों के बारे में तुरंत जानकारी मिल सकेगी।
भाषा नरेश
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