नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (भाषा) तेल एवं गैस नियामक पीएनजीआरबी ने अप्रयुक्त तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) पुनर्गैसीकरण क्षमता को सूचीबद्ध करने और उसकी बुकिंग के लिए एक मंच शुरू करने के इंडियन गैस एक्सचेंज (आईजीएक्स) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
इस कदम का उद्देश्य गैस संबंधी बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना और देश के गैस बाजार तक पहुंच का दायरा बढ़ाना है।
पुनर्गैसीकरण तरल रूप में परिवहन की जाने वाली एलएनजी को पाइपलाइन के जरिये आपूर्ति के लिए वापस गैस में बदलने की प्रक्रिया है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) ने कहा कि यह स्वैच्छिक मंच एलएनजी टर्मिनल परिचालकों और क्षमता धारकों को अप्रयुक्त क्षमता सूचीबद्ध करने की अनुमति देगा, जिससे संभावित उपयोगकर्ता अपनी आवश्यकताओं के अनुसार उपलब्ध स्लॉट की पहचान और उनकी बुकिंग कर सकेंगे।
यह पहल ऐसे समय में की गई है जब कई एलएनजी टर्मिनल कम क्षमता उपयोग की जानकारी दे रहे हैं, जिससे प्रतिस्पर्धी शुल्कों पर अप्रयुक्त पुनर्गैसीकरण क्षमता की पेशकश करके अतिरिक्त कार्गो को आकर्षित करने की गुंजाइश बनती है।
इस मंच से पुनर्गैसीकरण सेवाओं की कीमत तय करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता आने और उचित दर निर्धारित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके तहत उपलब्ध क्षमता को सूचीबद्ध किया जा सकेगा और इच्छुक पक्ष उस तक पहुंच बना सकेंगे। खरीदार अपनी क्षमता संबंधी जरूरतें भी बता सकेंगे, जिससे उपलब्ध बुनियादी ढांचे और मांग के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी।
पीएनजीआरबी ने कहा कि आईजीएक्स क्षमता की बुकिंग में सुविधा प्रदान करेगा, जबकि वाणिज्यिक बातचीत, भुगतान का निपटान और जोखिम प्रबंधन खरीदारों तथा विक्रेताओं के बीच उनके संबंधित समझौतों के तहत सीधे होगा। टर्मिनल संचालकों, क्षमता रखने वाली कंपनियों और संभावित उपयोगकर्ताओं के लिए इस मंच में भाग लेना स्वैच्छिक होगा।
नियामक ने कहा कि यह पहल प्राकृतिक गैस पाइपलाइन के शुल्क क्षेत्रों की संख्या घटाकर दो करने के उसके पहले के फैसले को और प्रभावी बनाएगी। इस कदम का उद्देश्य खपत केंद्रों से दूर स्थित एलएनजी टर्मिनलों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है।
इन दोनों उपायों से पुनर्गैसीकरण क्षमता तक पहुंच आसान होने और विभिन्न टर्मिनलों के जरिये एलएनजी की खरीद को किफायती बनाने में मदद मिल सकती है। इससे मौजूदा गैस संबंधी बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
भाषा पाण्डेय रमण यासिर
रमण