मुंबई, 16 अक्टूबर (भाषा) कला प्रदर्शनी 'आर्ट मुंबई' के आगामी चौथे संस्करण में सागौन की लकड़ी पर उकेरी गई आदिवासी देवी-देवताओं की कहानियां, बलुआ पत्थर व पीतल में मंदिर मूर्तिकला की परंपराएं और कांस्य व इस्पात के माध्यम से उपभोक्ता संस्कृति की बातें यह दर्शाएंगी कि सामग्रियां किस तरह इतिहास और समय के साथ जुड़ी स्मृतियों को अपने भीतर संजोकर रखती हैं।
महालक्ष्मी रेसकोर्स में 12 नवंबर से शुरू होने वाले इस कला मेले में गैलरी प्रस्तुतियों, वार्ताओं के कार्यक्रम, पैदल यात्राएं (गाइडेड वॉक) और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ 'मेटेरियल एंड मेमोरी' (सामग्री और स्मृति) विषय पर आधारित एक मूर्तिकला पार्क भी शामिल होगा। इसमें प्रसिद्ध समकालीन कलाकारों द्वारा विभिन्न सामग्रियों और कलात्मक तरीकों से बनाई गई मूर्तियों को प्रदर्शित किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार, यह विषय कलाकारों द्वारा उपयोग की जाने वाली सामग्रियों और उनके द्वारा व्यक्त की जाने वाली कहानियों के बीच के संबंध को दर्शाता है।
ये मूर्तियां यह पता लगाती हैं कि मिट्टी, टेराकोटा (पकी हुई लाल मिट्टी), पत्थर, लकड़ी, धातु, कपड़े और पाई गई पुरानी वस्तुएं किस प्रकार समय, स्थान और अनुभवों के निशानों को संभालकर रख सकती हैं।
जहां कुछ कृतियां विरासत में मिली परंपराओं और लोककथाओं पर आधारित हैं, वहीं अन्य विस्थापन, उपभोग, पारिस्थितिकी (पर्यावरण संतुलन) और लोगों व उनके परिवेश के बीच के संबंधों पर विचार करती हैं।
अन्य कृतियां समकालीन चिंताओं के माध्यम से सामग्री और स्मृति के प्रश्नों तक पहुंचती हैं।
इस प्रदर्शनी में भाग लेने वाले कलाकारों में तेजा गावणकर, जोनाथन ट्रायटे, मधु दास, दिव्या मेहरा, सतीश गुजराल, व्योम मेहता, अदिति जोशी, साक्षी गुप्ता, साजिद वाजिद शेख, पोर्स एंड राव और सुमाक्षी सिंह आदि शामिल हैं।
यह कला मेला 15 नवंबर को संपन्न होगा।
भाषा सुमित वैभव
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