चेन्नई, 16 अक्टूबर (भाषा) तमिलनाडु के विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) का जो आदेश दिया है, वह दरअसल मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के बाद विपक्षी दलों को शांत करने की एक कोशिश है।
उसने चेतावनी दी कि अगर इस आगामी प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी होती है, तो वह इसका विरोध करेगा।
निर्वाचन आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण की घोषणा की है, जिसके लिए एक जनवरी 2027 को पात्रता तिथि तय किया गया है। यह प्रक्रिया 12 नवंबर को एक मसौदा मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ शुरू होगी।
इसके बाद दावे (क्लेम) पेश करने का मौका मिलेगा जो 11 दिसंबर को समाप्त होगा और अंत में चार जनवरी 2027 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा।
वरिष्ठ नेता और द्रमुक प्रवक्ता टी.के.एस. इलांगोवन ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘वह (आयोग) विपक्षी दलों की आवाज़ दबाना चाहता है। एसआईआर के दौरान कई नाम हटा दिए गए थे। इसलिए वह एक समझौते की स्थिति पर आना चाहता है। इसी वजह से वह एसएसआर को बढ़ावा दे रहा है।’’
उन्होंने कहा कि विपक्षी दल इस प्रक्रिया पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।
उन्होंने कहा,‘‘कम से कम अब लोग तो चुप रहेंगे। विपक्षी दल भी चुप रहेंगे। हम देखते हैं कि एसएसआर में क्या होता है। अगर यह एसएसआर भी गलत हुआ, तो हम इसके खिलाफ लड़ेंगे।’’
इलांगोवन ने एसएसआर विवाद को लेकर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की भी आलोचना की और कहा कि उन्हें सीधे टकराव से बचने के बजाय, खुलकर भाजपा और अहम फैसले लेने वालों के खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए थी।
द्रमुक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘उन्हें (विजयन को) खुलकर बताना चाहिए कि यह किसने किया और इसके पीछे कौन था। उन्हें उनके नाम लेने चाहिए। लेकिन वह ज्ञानेश कुमार या भाजपा के बारे में कुछ नहीं कह रहे हैं। वह बस इतना कहते हैं कि कुछ गलत हो रहा है, बस इतना ही। वह उनसे डरते हैं।’’
इलांगोवन ने सीएए-विरोधी प्रदर्शनों में शामिल अभिनेता इमरान खान को भेजे गए नोटिसों को लेकर निर्वाचन आयोग के कामकाज की भी आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि यह संवैधानिक संस्था केंद्र में सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में झुकी हुई है।
भाषा राजकुमार संतोष
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