नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (भाषा) रेल संबंधी संसद की स्थायी समिति ने 2026-27 के दौरान परिचालन सुरक्षा, यात्री सुविधाओं, यात्री आरक्षण प्रणाली, माल ढुलाई सेवाओं और आधुनिकीकरण समेत 21 विषयों की समीक्षा करने का फैसला किया है।
समिति अपने विभिन्न कार्यों के तहत एक वित्त वर्ष के दौरान रेल मंत्रालय के कामकाज, नीतियों और वित्त से जुड़े कई विषयों का चयन करती है, उनकी समीक्षा करती है तथा उन पर रिपोर्ट तैयार करती है।
इन रिपोर्ट को बाद में संसद में पेश किया जाता है और इनमें मंत्रालय के लिए विभिन्न सिफारिशें की जाती हैं, ताकि वह आवश्यक कदम उठाते हुए सुधार कर सके।
समिति द्वारा चुने गए यात्री-केंद्रित विषयों में भारतीय रेल के परिचालन में सुरक्षा की स्थिति, रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं में सुधार, यात्री आरक्षण प्रणाली का कामकाज और भारतीय रेल में ट्रेन के भीतर दी जाने वाली सेवाओं का मूल्यांकन शामिल है।
इसके अलावा समिति ने वाणिज्य से जुड़ी कई गतिविधियों को भी समीक्षा के लिए चुना है। इनमें रेलवे की भूमि का अधिकतम उपयोग और स्टेशन क्षेत्रों का योजनाबद्ध वाणिज्यिक विकास तथा मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क का विकास और सड़क एवं बंदरगाह नेटवर्क के साथ उनका एकीकरण शामिल है।
रेलवे की माल ढुलाई सेवाओं में मात्रा और राजस्व योगदान के लिहाज से कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट और क्लिंकर की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक है। ऐसे में समिति रेलवे की माल ढुलाई में विभिन्न वस्तुओं की हिस्सेदारी बढ़ाने के उपायों की समीक्षा करेगी।
भारतीय रेल के कई सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम और कार्यशालाएं महत्वपूर्ण कार्यों को अंजाम देने के साथ परिचालन संबंधी चुनौतियों से निपटने में भी मदद करती हैं। इसलिए समिति इनके प्रदर्शन के साथ-साथ भारतीय रेल की वृद्धि एवं विस्तार में उनकी भूमिका तथा कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) से जुड़ी गतिविधियों की भी समीक्षा करेगी।
रेलवे की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल भारत में उच्च गति रेल नेटवर्क भी समिति के अध्ययन के विषयों में शामिल है।
सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में करीब 4,000 किलोमीटर लंबे सात उच्च गति रेल गलियारों की घोषणा की थी जिनमें कुल मिलाकर करीब 16 लाख करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है।
समिति भारतीय रेल में ऊर्जा दक्षता, देश में उपनगरीय रेल नेटवर्क की स्थिति और प्रगति की भी समीक्षा करेगी। इसमें नयी परियोजनाएं और विस्तार योजनाएं शामिल हैं। इसके साथ ही बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए भारतीय रेल में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) की पहलों की भी समीक्षा की जाएगी।
समिति रेलवे आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने, मानव संसाधन प्रबंधन और विरासत संरक्षण से जुड़े विषयों की भी समीक्षा करेगी।
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