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कांग्रेस नेता ने यूडीएफ सरकार के रुख पर उठाए सवाल

तिरुवनंतपुरम, 16 अक्टूबर (भाषा) कांग्रेस नेता जिंटो जॉन ने कथित सीएमआरएल (कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड) रिश्वत मामले में केरलम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन और उनके परिवार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बजाय प्रारंभिक जांच कराने के संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार के फैसले की शुक्रवार को आलोचना की।

केरलम उच्च न्यायालय ने विजयन, उनकी बेटी वीणा टी. और वीणा के पति पी. ए. मोहम्मद रियास की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिनमें उन्होंने नौ अक्टूबर के एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती दी थी।

एकल न्यायाधीश ने इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (वीएसीबी) को विजयन और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था।

एकल न्यायाधीश का आदेश आने से पहले राज्य सरकार ने विजयन और उनके परिवार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बजाय प्रारंभिक जांच कराने का फैसला किया था।

ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई जांच और तलाशी के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर मामला दर्ज करने का अनुरोध किया था।

एजेंसी ने आरोप लगाया है कि सीएमआरएल ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) परामर्श सेवाओं के नाम पर वीणा की अब बंद हो चुकी कंपनी ‘एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस’ को तीन करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी भुगतान किया था।

कांग्रेस विधायक मैथ्यू कुझलनादन ने भी सरकार के फैसले पर सवाल उठाए।

उन्होंने बृहस्पतिवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश और खंडपीठ, दोनों ने कहा है कि ईडी से जानकारी मिलने के बाद प्रारंभिक जांच की जरूरत नहीं थी और ऐसे में सरकार को अपने रुख पर पुनर्विचार करना चाहिए।

जिंटो जॉन ने शुक्रवार को फेसबुक पर एक पोस्ट में भ्रष्टाचार के आरोपों और राजनीतिक विरोधियों के प्रति कांग्रेस नेतृत्व के रुख में आए कथित बदलाव पर सवाल उठाए।

जॉन ने पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी के खिलाफ सौर ऊर्जा घोटाले से जुड़े एक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की सिफारिश करने के पिछली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार के फैसले का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि पिनराई विजयन की ओर से गठित तीन जांच दलों को कोई साक्ष्य नहीं मिलने के बावजूद चांडी के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश की गई थी।

जॉन ने सवाल किया कि क्या कांग्रेस नेता पुनर्जनी मामले में मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन को कथित तौर पर फंसाने की कोशिशों और मॉनसन मावुंकल मामले में झूठे बयानों के आधार पर सांसद के. सुधाकरन को कथित रूप से परेशान किए जाने की घटनाओं को भूल गए हैं?

जॉन ने पिछली सरकार के कार्यकाल में युवा और छात्र नेताओं की गिरफ्तारियों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विजयन के परिवार से जुड़े कथित भ्रष्टाचार की जांच कराने की मांग करने के कारण मैथ्यू कुझलनादन को निशाना बनाया गया था।

प्रारंभिक जांच कराने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए जॉन ने कहा कि केवल ईडी के पत्र के आधार पर जल्दबाजी में मामला दर्ज न करना उचित है लेकिन इसमें अत्यधिक देरी से संदेह पैदा हो सकता है, खासकर तब जब आरोपों का सामना कर रहे लोग उनका संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे हों।

जॉन ने कहा कि सरकार को ऐसा रुख नहीं अपनाना चाहिए जिससे उन कांग्रेस कार्यकर्ताओं को शर्मिंदगी महसूस हो, जिन्होंने पिछली सरकार के खिलाफ कई बार भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।

उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसा कोई संकेत नहीं देना चाहिए कि वह विजयन और उनके परिवार के पक्ष में काम कर रही है तथा भ्रष्टाचार के आरोपों पर कानूनी प्रक्रिया के जरिए कार्रवाई होनी चाहिए।

भाषा सिम्मी नरेश

नरेश